अयोध्या। अयोध्या मामले में संभावित फैसले को लेकर रविवार को मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब के आवास पर मुस्लिम समाज की बैठक हुई।
अध्यक्षता कर रहे हाजी महबूब ने कहा कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, हम उसे मानने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में बाहरी तत्वों के प्रवेश पर रोक लगनी चाहिए।
साथ ही प्रशासन हमारी सुरक्षा का भी प्रतिबंध करे। उन्होंने मुस्लिम भाइयों से अपील की कि वे किसी बहकावे में न आएं और किसी प्रकार के अफवाहों पर ध्यान न दें।
अयोध्या मामले की सुनवाई 17 अक्तूबर को समाप्त हो रही है। इसके बाद संभावित फैसले को लेकर स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ सभी पक्षकार भी अलर्ट है और फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
रविवार को मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब के आवास पर हुई बैठक में हाजी ने कहा कि बाबरी मस्जिद को लेकर कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा तरह-तरह की बयानबाजी की जा रही है, हम इसका विरोध करते हैं। सुप्रीम कोर्ट देश की सबसे बड़ी अदालत है।
अयोध्या मामले में कोर्ट का जो भी निर्णय आएगा, हमें कोई ऐतराज नहीं है। मुस्लिम समाज को एहतियात बरतने की सलाह भी दी जा रही है कि लोग किसी के बहकावे में न आवें।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में बाहर के लोगों को आने की जरूरत नहीं है। ऐसे बाहरी तत्वों के आगमन पर रोक लगनी चाहिए। अयोध्या में हमेशा अमन-चैन रहा है, यहां का माहौल बाहर के लोग बिगाड़ते हैं। हमें प्रशासन पर पूरा भरोसा है, हमारी सुरक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए।
विहिप दीप जलाएगा, मुसलमान पढ़ेंगे नमाज
दीपोत्सव के दौरान विवादित परिसर में विहिप की 51 हजार दीप जलाने की मांग को लेकर मुस्लिम समाज ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा है कि विवादित परिसर में यदि विहिप को दीप जलाने की अनुमति मिलती है तो मुस्लिम समाज भी रिसीवर से मिलकर विवादित परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति मांगेगा। हाजी ने कहा कि विवादित परिसर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बिना नया कार्यक्रम नहीं हो सकता। कहा कि अगर विहिप को अनुमति मिलती है तो मुस्लिम समाज भी विचार करेगा। विहिप ने रामलला के दरबार में इस दीपोत्सव 51 हजार दीप जलाने की तैयारी की है। इसके लिए विहिप व साधु-संतों का एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को रिसीवर मनोज मिश्र से मिलकर अनुमति मांगेंगा।