युवाओं की आबादी प्रभावपूर्ण भूमिका में है लेकिन उसकी आवाज अनसुनी है। उसे लालच देकर बरगलाया जा रहा है। युवाओं के लिए ऐसी नीति बने कि पढ़ने-लिखने के बाद ट्रेंड के मुताबिक नौकरी तो लग जाए। बुनियादी सुविधाओं की कमी अभी भी मुंह बाए खड़ी है।
आखिर आजादी के इतने वर्ष बाद भी सभी तक बिजली, पानी, सड़क और स्वास्थ्य की सुविधा क्यों नहीं पहुंच पाई? सवालों के तीर बुनियादी सुविधाओं की अनुपलब्धता पर चलती रही। यह माहौल था गुरुवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि के आईटी परिसर स्थित सरयू छात्रावास का जहां पर अमर उजाला की ओर से आयोजित कैंपस अड्डा में छात्राें ने अपनी राय व्यक्त की।
एक छात्र ने कहा कि जो सुविधाएं बहुत जरूरी हैं, वह भी नहीं मिल पा रही हैं। छात्रावास में पग-पग पर असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। एक युवा ने कहा कि नकल के शिक्षा की साख गिरती जा रही है। सिर्फ डिग्री के आधार पर मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है।
नकल पर सख्ती से नियंत्रण लगाने की जरूरत है। एक छात्र ने कहा कि राजनीति की नजर में तो युवा वोट बैंक बन गया है। हर पार्टी युवाओं की बात करती है लेकिन उनके हाथों को काम देने के बजाय उन्हें लालच देती है। एक छात्र ने कहा कि नेता वोट हासिल करने के लिए हर वर्ग को लालची बना रहे हैं। युवा को रोजगार चाहिए।
एक छात्र ने नेताओं की कार्यपद्धति पर सवाल करते हुए कहा कि चुनाव के पहले नेता सक्रिय हो जाते हैं। यदि यहीं सक्रियता सतत रूप से बनी रहे तो विधानसभा क्षेत्र से लेकर समूचे प्रदेश की हालत अच्छी होने में देर नहीं लगेगी। भ्रष्टाचार का मुद्दा भी गूंजा।
एक युवा ने कहा कि रोजगार के अवसर कम हैं। जहां हैं भी, भ्रष्टाचार के कारण यह अवसर और विकल्प सभी को नहीं मिल पाता है। जिसके पास रुपया है, वही वर्तमान सिस्टम में मजे में है। व्यवस्थागत खामियों को दूर करने की मांग करते हुए एक छात्र ने कहा कि व्यवस्थागत खामियों को दुरुस्त किए जाने की जरूरत है जिससे कि प्रतिभाओं का पलायन रुक जाए। पढ़ने-लिखने के बाद जब नौकरी नहीं मिलती तो प्रतिभाएं बाहर चली जाती हैं। यहीं पर उद्योग धंधे लगे तो विकास होगा।
जाति और धर्म की राजनीति को देश के लिए दुखद बताया गया। एक युवा ने कहा कि इसके कारण देश का बड़ा नुकसान किया है। बांटो और राज करो की नीति से सजग होना चाहिए। नेता तो विभाजनकारी नीतियों के कारण मजे में है लेकिन जनता परेशान है। एक युवा ने कहा कि पढ़ने-लिखने के बाद युवाओं को रोजगार की तलाश में मजबूरी में बाहर जाना पड़ता है।