जिले में परिषदीय स्कूलों के छह हजार शिक्षकों का वेतन शासन में लटक गया है। अधिकारी बजट न आने का रोना रो रहे हैं, जबकि दो हजार समायोजित शिक्षामित्रों के शिक्षक मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद से ही सितंबर का वेतन लटका हुआ है। ऐसे में नवरात्र, दशहरा और दीपावली को लेकर शिक्षक व उनके परिवार के लोग धनाभाव से जूझ रहे हैं। शिक्षकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। त्योहारी माह होने के कारण परिवार का खर्च अन्य माह के सापेक्ष बढ़ जाता है फिर भी शिक्षकों के खाते में वेतन की धनराशि नहीं पहुंच पाई है।
जिले में दो हजार शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक पद पर समायोजन हुआ है लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद इन्हें मिलाकर सभी छह हजार शिक्षकों का वेतन नहीं दिया जा रहा है। एबीएसए स्तर से वेतन बिलों को लेकर बीएसए व लेखाधिकारी को पत्र लिखे गए, तो सभी का वेतन बिल कैसे बने, इसपर शासन से अनुमति मांगी गई। हाल यह है कि शासन ने हाईकोर्ट के आदेश का संज्ञान लेकर न दो हजार समायोजित शिक्षकों के मामले में कोई निर्देश दिया है, न नियमानुसार कार्यरत बाकी 4 हजार शिक्षकों को लेकर। अलबत्ता अब वेतन भुगतान मद का बजट ही रोक दिया गया है।
दशहरा की खरीद को लेकर शिक्षकों के बच्चे व परिवारीजन परेशान हैं। स्कूलों की फीस भी अक्तूबर होने से तीन-तान माह की जमा नहीं हो पाई है। कई शिक्षकों को स्कूलों से बच्चों की फीस न जमा होने से नोटिस तक मिल रहा है। इसे लेकर शिक्षकों में आक्रोश है। वे कहते हैं कि हर माह की एक तारीख को शिक्षकों के खाते में वेतन आ जाता था लेकिन अक्तूबर का एक पखवारा बीत गया, अध्यापकों को वेतन नहीं मिल पाया।
नवरात्र, दशहरा के बाद दीपावली को लेकर भी परिवारों में निराशा है। वेतन न मिल पाने के कारण पहले जैसी रौनक नहीं है। शिक्षामित्र से शिक्षक पद पर समायोजित अध्यापकों को कोर्ट ने अयोग्य घोषित कर दिया। ऐसे में उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। अन्य शिक्षकों को वेतन देने से पहले से नाराज चल रहे शिक्षामित्र कहीं और अधिक नाराज न हो जाए, इसी फेर में जिले के बाकी चार हजार शिक्षकों को भी धनाभाव से गुजरना पड़ रहा है।