चौक के ऐतिहासिक घंटाघर में लगी घड़ी का चेहरा बदल गया है। अंग्रेजों के जमाने में लगी और पिछले 30 वर्षों से बंद पड़ी घड़ी तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं चल सकी तो नगरपालिका ने उसी पुरानी घड़ी के आगे नयी फ्रेम व बैटरी से चलने वाली दूसरी घड़ी लगाकर चौक का दिल धड़का दिया।
नागरिक अब चारों दिशाओं से घड़ी में समय देख सकेंगे। नगर पालिका ने कई सालों से तमाम मिस्त्रियों को बुलाकर ऐतिहासिक घड़ी को सही कराने का प्रयास किया, लेकिन पार्ट्स न मिल पाने की बात कहकर सभी ने घड़ी ठीक करने से इंकार कर दिया।
अहम सवाल घंटाघर की ऐतिहासिक पुरानी घड़ी हटाए बगैर दूसरी घड़ी लगाने का भी था। ऐसे में स्थानीय एजेंट के माध्यम से बंगलूरू से बैटरी से चलने वाली चार नई घड़ियां मंगाई गयीं।
घंटाघर की रंगाई, पुरानी घड़ी के आगे नई घड़ी की फ्रेमिंग और चारों घड़ियों पर करीब 78 हजार रुपये खर्च हुए हैं। कहा, बदले रूप में ही सही करीब 30 साल बाद घंटाघर का दिल धड़कने लगा है।
लोगों को उम्मीद है कि चौक का यह दिल अब लंबे समय तक धड़केगा और चारों दिशाओं से नागरिक घंटाघर की घड़ी से समय देख व मिला सकेंगे।