जिले में गन्ना पेराई शुरू हो गई, लेकिन अभी तक शासन से गन्ना मूल्य निर्धारण नहीं हो सका है। ऐसे में चीनी मिलों से गन्ना बेचने वाले किसानों को तब तक कोई भुगतान नहीं होगा, जब तक गन्ना मूल्य का निर्धारण नहीं हो जाता।
परिक्षेत्र में तीन चीनी मिलें हैं। शासनादेश के तहत गन्ना खरीद के एक पखवारे बाद किसानों को खरीदे गए गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाना चाहिए। चीनी मिल मसौधा 27 नवंबर को शुरू हो गई।
इस मिल ने 15 दिसंबर तक लगभग दस लाख क्विंटल गन्ना खरीद लिया था। इसी प्रकार चीनी मिल रौजागांव तीन दिसंबर से लेकर अब तक सात लाख क्विंटल और मिझौड़ा चीनी मिल भी सात लाख पांच हजार क्विंटल गन्ना खरीद चुकी है।
तीनों मिलों ने अब तक 22 लाख क्विंटल से अधिक का गन्ना खरीद किया है। हालांकि अभी तक प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य का निर्धारण नहीं किया है। नतीजतन चीनी मिलें गन्ना खरीदकर उनकी पेराई कर रही है, लेकिन भुगतान नहीं।
जिला गन्ना अधिकारी हेमराज सिंह का कहना है कि जब तक शासन से गन्ना मूल्य का निर्धारण नहीं हो जाता है तब तक गन्ना मूल्य का भुगतान किए जाने का कोई सवाल भी नहीं उठाता। शासन से गन्ना मूल्य का निर्धारण के बाद ही किसानों से खरीदे गए गन्ने का भुगतान किया जाएगा।