समय-समय पर अयोध्या-फैजाबाद की धरोहरों और ऐतिहासिक स्थलों को संवारने के दावे होते हैं। पर्यटकों की लुभावनी योजनाएं ज्यादातर फाइलों में गुम हैं, तो करोड़ों खर्च के बाद भी अंतरराष्ट्रीय रामलीला केंद्र व रामकथा संग्रहालय का निर्माण अधर में लटके हैं।
12 करोड़ की लागत से बनने वाला रामकथा संग्रहालय और आर्ट गैलरी 2008 से शुरू होकर बना भी तो अब तक इसकी उपयोगिता साबित नहीं हो पाई। साढ़े तीन करोड़ की लागत वाला अंतरराष्ट्रीय राम लीला केंद्र अयोध्या दो साल बाद भी अधूरा है। तीन करोड़ 12 लाख की लागत वाला शिल्प ग्राम अरबन हाट भी अपना योगदान अब तक दे नहीं सकी है।
पिछले तीन वर्षों से अयोध्या व फैजाबाद को विश्व पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए केंद्र और प्रदेश की सरकारें समय-समय धन दिलाने और घोषणाएं करने से नहीं चूक रही हैं। अयोध्या के 18 कुंडों के साथ ही भरतकुंड, सूर्यकुंड व गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड को सजाने संवारने के लिए धन मिला था। कुछ काम शुरू हुए, लेकिन अगली किश्त न मिल ने से काम जहां-तहां ठहर गया।
जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल-अयोध्या- राम की पैड़ी, जन्मभूमि, कनक मंदिर, हनुमान गढ़ी, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण न्यास कार्यशाला, राम की पैड़ी, सरयू तट, सूर्यकुंड, दंतधावन कुंड, तुलसी उद्यान, ऋषभ देव राजघाट उद्यान समेत सभी कुंड।
फैजाबाद-गुप्तारघाट, बड़ी देवकाली मंदिर, गुलाबबाड़ी, बहू-बेगम मकबरा, बनी खानम का मकबरा, कंपनी गार्डेन। भरतकुंड, गौराघाट गयासपुर, श्रृंगी ऋषि आश्रम, कामाख्या देवी मंदिर।