अमर उजाला के सियासी अड्डे में रविवार को मौजूद लोग।
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पहले राजधानी थी, अब कहानी बनकर रह गई है। यहां अरबों रुपये खर्च हो गए, मगर सूरत नहीं चमकी। घाट से लेकर मंदिरों व होटलों तक न ढंग की सड़क है, न सीवर लाइन। बिजली भी बदहाल है। भक्तों व पर्यटकों को तमाम परेशानी झेलनी पड़ती है।
यहां आने वालों के लिए न रुकने के बेहतर इंतजाम हैं, न बाजार है। सड़क पर ठहरने के कारण कई बार श्रद्धालु वाहनों से कुचले जा चुके हैं, जहां रैन बसेरे बने हैं, वह बदहाल पड़े हैं। रोड का चौड़ीकरण हुआ तो बिजली के पोल बीच में छोड़ दिए गए।
‘रात को चूके तो गए’ जैसी हालत है। सड़क बनते ही उसे खोदकर सीवर लाइन डाल दी गई, जो अधूरी पड़ी है। उसके ढक्कन गाड़ियों में ठोकर मारते रहते हैं। नालियां बजबजा रही हैं। सड़क पर जगह-जगह कूड़े के ढेर हैं। बजबजाती नालियों से दुर्गंध भरा माहौल है।
शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक सुविधाओं का अभाव है। ये समस्याएं अयोध्या के बिड़ला धर्मशाला में अमर उजाला के सियासी अड्डा कार्यक्रम के दौरान लोगों ने गिनाते हुए नियोजित विकास की मांग उठाई।