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जिला पंचायत के चुनाव में सपा का दबदबा, अध्यक्षी पर निगाहें

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अयोध्या। जिला पंचायत चुनाव में मिले जबरदस्त समर्थन के बाद जिले में सपाइयों में उत्साह नजर आ रहा है। जिले की आधे से अधिक सीटों पर सपा प्रत्याशियों का कब्जा होने के बाद अब सपाई जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर निगाहें जमाने लगे हैं। जीत से उत्साहित प्रत्याशी अभी तो कुछ बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन दबी जुबान अपनी दावेदारी से गुरेज भी नहीं कर रहे हैं। वहीं, पार्टी के बड़े नेता जिला पंचायत चुनाव के इस परिणाम को आगामी विधानसभा का सेमीफाइनल मानते हुए गदगद दिख रहे हैं।
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बीते लोकसभा व विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद काफी अरसे बाद सपाई खेमे में भी उम्मीद की कुछ किरणें नजर आई हैं। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में आधे से अधिक सीटों पर सपा व सपा के ही बागी प्रत्याशियों की जीत से उत्साहित सपा कार्यकर्ता अब जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर दोबारा निगाहें जमाने लगे हैं। हालांकि, इस सीट पर अपना प्रत्याशी जिताने की रणनीति भाजपा भी बना रही है, लेकिन भाजपा प्रत्याशियों की जीत दहाई का अंक भी पार नहीं कर सकी।
जिससे अध्यक्ष की कुर्सी हासिल करने की राह आसान नहीं नजर आ रही है। वहीं, इतनी तादाद में सपा प्रत्याशियों की जीत से सपा कुनबे में नेता व कार्यकर्ता अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने के दावे भी करने लगे हैं। इस बार का पंचायत चुनाव इस बार भी रोचक नजर आ रहा है कि इससे पहले भी समाजवादी पार्टी ने सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशियों को शिकस्त देकर जिला पंचायत चुनाव कांटे की टक्कर के साथ जीता है। बसपा सरकार के दौरान 2005 में हुए चुनाव में सपा की मीना गुप्ता ने बसपा की रश्मि जायसवाल को पराजित किया था।
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इसके अलावा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लागू होने के बाद से अब तक हुए चुनाव में चार बार सपा का ही कब्जा रहा है। एक बार बसपा प्रत्याशी चुनाव जीता भी तो कार्यकाल पूर्ण करने से पहले ही अविश्वास प्रस्ताव आ गया था। 2015 के चुनाव में भी सपा की श्वेता सिंह निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थीं। इस बार भी समीकरण अपने पक्ष में देकर सपाइयों में उत्साह नजर आना स्वाभाविक है।
पिछली बार टिकट न मिलने से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पाने से वंचित रहे सेन परिवार की दावेदारी इस बार भी प्रबल मानी जा रही है। पूर्व मंत्री आनंदसेन यादव की पत्नी इंदुसेन यादव के चुनाव जीतने के बाद से इसकी चर्चा सपाई खेमे में खूब हो रही है। हालांकि, पूर्व मंत्री आनंदेसन यादव अभी खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव शीर्ष नेतृत्व यदि लड़ाएगा तो जरूर लड़ा जाएगा। चुनाव का समीकरण सपा के ही पक्ष में है, निश्चित तौर पर चुनाव सपा ही जीतेगी। वहीं, मया द्वितीय से भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष को रिकॉर्ड मतों से पराजित करने वाले सपा नेता राजमणि यादव ने भी चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, लेकिन इसका निर्णय शीर्ष नेतृत्व पर ही छोड़ा है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का नेतृत्व कर रहे सपा जिलाध्यक्ष गंगा सिंह यादव भी चुनाव के नतीजों से बेहद उत्साहित नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि जनता में भाजपा सरकार के प्रति आक्रोश है, जनता विधानसभा चुनाव का इंतजार कर रही है। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता समाजवादी पार्टी की सरकार चाहती है, पंचायत चुनाव उसकी का सेमीफाइनल है।
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