फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां सरयू की आरती के साथ सिंहल की अस्थियां विसर्जित

Fri, 27 Nov 2015 11:20 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
यह अजब इत्तेफाक था कि विहिप नेता अशोक सिंहल की अस्थि कलश यात्रा जैसे ही सरयू घाट पहुंची, ठीक उसी क्षण हर शाम की तरह अपने नियत वक्त पर सरयू मां की आरती शुरू हो गई।
विज्ञापन


आरती की आध्यात्मिक ध्वनियों के बीच अशोक सिंहल की अस्थियां सरयू में विसर्जित हो गई। इस दौरान सिंहल जी आत्मा, साधु-संत महात्मा, सिंहल जी के प्राण बसे है मंदिर के निर्माण में गगनभेदी उद्घोष से सरयू तट गुंजायमान हो उठा।

अस्थि विसर्जन के पूर्व बेहद भावुक हो साधु संतों ने सिंहल की जीवन यात्रा और उनके दृढ़ संकल्पों को याद किया। श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने कहा कि उन्होंने हिंदू धर्म के लिए जो भी संभावित था, सब किया।
विज्ञापन


आदिवासी क्षेत्रों में एकल विद्यालय खोला। लोगों को ईसाई होने से बचाया। उन्हीं के प्रयास ने लोगों को जागृत किया जिससे हिंदू जाति के ऊपर लगा कलंक का टीका हट गया।

धर्मनिरपेक्ष शासनकाल में कारसेवकों के माध्यम से कलंक के टीके को सदा के लिए मिटा दिया। आरएसएस, विहिप और हिंदू जाति को चाहिए कि उनका संकल्प पूरा करे।

विहिप के महामंत्री चंपतराय ने कहा कि उनको अंतिम समय तक देश और मंदिर की चिंता सताती रही। आईसीयू में 89 घंटे तक कुछ नहीं बोले। वह मृत्यु को कबड्डी का खेल मानते थे। कहते थे कि जाएंगे और तुरंत आएंगे।

अक्सर कहा करते थे कि गंगाजल कभी एक्सपायरी नहीं होता जबकि मिनरल वाटर एक्सपाइरी होता है। इसलिए हम लोग गंगा को मां कहते हैं। सांसद लल्लू सिंह ने कहा कि अशोक सिंहल सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के सन्यासी योद्धा थे।
विज्ञापन


लोगों में यह भाव जगाने के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। हम संतचरण से निवेदन करते हैं कि जो उनकी इच्छा थी, वह पूरे देश में प्रभावी बने।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें