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रामजन्मभूमि की धार्मिकता को साबित कर रहे पुरावशेष

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अयोध्या रामजन्म भूमि परिसर में समतलीकरण के दौरान खोदाई में मिले मंदिर के पुराने अवशेष - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के लिए पुराने गर्भगृह स्थल पर चल रहे समतलीकरण के दौरान मिल रहे मंदिर के अवशेष रामजन्मभूमि की प्रमाणिकता को पुष्ट करने का काम कर रहे हैं। रामनगरी के संतों का मानना है कि जो अवशेष मिल रहे हैं वह करीब दो हजार वर्ष पुराने हैं।
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संतों ने इन अवशेषों को अमूल्य, धार्मिक धरोहर बताते हुए रामजन्मभूमि परिसर में ही संग्रहालय बनाकर संरक्षित करने की मांग उठाई है ताकि राममंदिर की प्रमाणिकता का इतिहास हमेशा जीवंत रहे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राममंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। हांलाकि इस बीच कोरोना ने दस्तक दे दी जिसके चलते राममंदिर का कार्य प्रभावित हुआ, लेकिन लॉकडाउन के दिशा निर्देशों का पालन करते मंद गति से ही सही राममंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है।
इसी क्रम में पुराने गर्भगृह स्थल के चारों तरफ समतलीकरण का कार्य भी शुरू हो चुका है। समतलीकरण के दौरान खोदाई में देवी-देवताओं की मूर्तियां, शंख, चक्र, शिव लिंग की आकृति, ब्लैक टच स्टोन, सैँड स्टोन सहित अन्य अवशेष प्राप्त हो रहे हैं। रामनगरी के संतों का कहना है कि खोदाई में मिल रहे अवशेष सनातन धर्म, संस्कृति के धार्मिक गौरव की महत्ता दर्शा रहे हैं। संतो ने यह भी कहा कि भूमि विवाद में लंबे समय तक चली अदालती कार्रवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के मंदिर के हक में दिए गए फैसले को भी ये अवशेष पुष्ट करने का काम कर रहे हैं।
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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास का कहना है कि पहले से ही भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर उस स्थान पर था। आक्रांताओं ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाया। समतलीकरण के दौरान मिल रहे पुरावशेषों से साबित हो रहा है कि वहां बहुत बड़ा विशाल मंदिर था, अभी और भी तमाम अवशेष खोदाई में मिलेंगें इसमें कोई संशय नहीं है। राममंदिर की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के लिए इन अवशेषों को संग्रहालय बनाकर संरक्षित किया जाना चाहिए।
श्रीरामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास कहते हैँ कि समतलीकरण में जो अवशेष मिल रहे हैं उससे साबित होता है कि दिव्य-भव्य रामलला का मंदिर था, मस्जिद मंदिर तोड़कर बनाई गयी थी। शंख, चक्र, त्रिशूल, आमलक की आकृति दर्शाती है कि जो लोग कह रहे थे कि वहां मंदिर नहीं है, उन्हें अब सबक लेना चाहिए। मंदिर को तोड़कर ही विवादित ढांचा बनाया गया था इससे यह भी साबित हो रहा है। कहा कि जो अवशेष मिल रहे हैं कि वे करीब दो हजार वर्ष पुराने हो सकते हैं, यह अवशेष हिंदू संस्कृति के प्रतीक हैं इन्हें परिसर में ही संरक्षित किया जाना चाहिए।
संत समिति के अध्यक्ष महंत कन्हैया दास रामायणी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राममंदिर के हक में जो निर्णय दिया है, खोदाई में मिल रहे अवशेषों से सुप्रीम फैसले को भी बल मिल रहा है। राममंदिर के अस्तित्व को नकारने वालों के लिए ये अवशेष बड़े सबूत के रूप में सामने आए हैं। अभी तो जब और गहराई तक खोदाई होगी तब और मंदिर के अवशेष मिलेंगें। रामजन्मभूमि की प्रमाणिकता को यह अवशेष और भी पुष्ट करने का काम कर रहे हैं। उन्हें राममंदिर ट्रस्ट से अपील किया है कि ये पुरावशेष सनातन संस्कृति के प्रतीक हैं इसलिए इनका संरक्षण किया जाना चाहिए।
हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने बताया कि पिछले कई दिनों से राममंदिर निर्माण के लिए चल रहे समतलीकरण के कार्य में विभिन्न प्रकार के अवशेष मिले हैं, जिसमें कसौटी दार खंभे, चक्र, धनुष बने स्तंभ, देवी-देवताओं की खंडित प्रतिमा यह सभी इस बात को स्पष्ट करते हैं कि यही स्थान भगवान श्रीराम का जन्म स्थान है। यहां करीब दो हजार वर्ष पूर्व महाराज विक्रमादित्य ने मंदिर निर्माण कराया था जिसे कुछ विदेशी आक्रांताओं ने आकर तोड़कर मस्जिद का आकार दिया था। अब खोदाई में मिल रहे अवशेष मंदिर की प्रमाणिकता सिद्ध कर रहे हैं।
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