गढ़मुक्तेश्वर के पास रविवार की रात हादसे की शिकार हुई दिल्ली-फैजाबाद एक्सप्रेस के यात्री सोमवार को यहां बदहवास व खौफजदा हालत में पहुंचे। घायलों के परिवारीजन उन्हें लेने स्टेशन पहुंचे और सहारा देकर ट्रेन से उतारा।
सुबह पौने 10 बजे के करीब 11 डिब्बों वाली ट्रेन से उतरे यात्री मौत के मुंह से बच निकलने पर ईश्वर को धन्यवाद दिया तो कई यात्रियों ने रेलवे की व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताई।
आमतौर पर प्लेटफार्म नंबर तीन पर लगने वाली ट्रेन को सोमवार को प्लेटफार्म नंबर एक पर लिया गया। गढ़मुक्तेश्वर के पास कपलिंग टूटने से हादसे का शिकार होने के बाद आठ कोच को वहीं छोड़कर शेष 11 कोच के साथ ट्रेन अपने निर्धारित समय 7:20 की जगह 9:45 बजे फैजाबाद पहुंची।
ट्रेन से दो घायल यात्री और गिरे कोचों में सवार रहे यात्री उतरे। महिलाओं और बच्चों के चेहरों पर दुर्घटना का खौफ सबसे अधिक दिखा। अयोध्या कोतवाली क्षेत्र के शाहजहांपुर निवासी घायल गुलाम अली ने कहा कि कुछ लोग भोजन कर रहे थे तो कई भोजन करके सीटों पर लेटे थे।
झटका लगते ही लोग एक दूसरे पर गिरने लगे। चीख-पुकार मच गई। परिवार को बचाने में पीठ में चोट लगी। आधे घंटे बाद बाहर निकाले गए और एक घंटे बाद इलाज हुआ। ट्रेन का आगे का हिस्सा 11 कोचों के साथ एक किमी. दूर चला गया। बाद में उसे वापस लाकर डेढ़ घंटे बाद हमें शिफ्ट किया गया।
मकबरा की रजिया के पैर में चोट लगी थी, रजिया हादसे का मंजर याद कर कांप उठतीं हैं। कहती हैं कि दुर्घटना के बाद हर तरफ कोहराम था। हर कोई रोता-चिल्लाता रहा। जिन्हें चोट नहीं लगी थी वह भी रो रहे थे। कई बच्चे और परिवार के सदस्य अपनों को खोजते और रोते-चिल्लाते रहे।
लगभग 12 सदस्यों के साथ सुरक्षित फैजाबाद पहुंचे नाजिम अली, सोहावल के सचिन जायसवाल, नगर से सटे गद्दौपुर के अशोक कुमार यादव, अनंतलाल, बस्ती के बृजराज सिंह, अयोध्या के संतोष सिंह, गाजियाबाद से तीन छोटे-छोटे बच्चों तथा पति के साथ फैजाबाद पहुंचीं अनीता शर्मा, पोरा फैजाबाद के सत्या रावत आदि ने अपनी दर्द भरी दास्तां सुनाई।
कहा कि कोचों में फंसे यात्री बचाने की गुहार लगाते रहे। यात्री लोगों को पानी पिलाते, ढांढस बंधाते और खोये हुओं की तलाश करते रहे। सबने सकुशल फैजाबाद आने पर ईश्वर को धन्यवाद दिया।