अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह के कार्यकाल में की गई सात असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियों को रद्द किए जाने के संकेत मिले हैं। गुरुवार को कार्यवाहक कुलपति प्रो. अखिलेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में हुई कार्य परिषद की बैठक में इस पर चर्चा की गई। हालांकि इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया है। इसी मामले को लेकर पूर्व कुलपति से राजभवन द्वारा इस्तीफा लिए जाने की भी चर्चा हुई थी।
मालूम रहे कि पूर्व कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह द्वारा वर्ष 2022 की शुरूआत में विवि में तीन एसोसिएट व छह असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की गई थी। इस भर्ती को लेकर कई आरोप लगे थे। भाजपा नेता रजनीश सिंह व साकेत महाविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के शिक्षक डॉ. जन्मेजय तिवारी ने इसकी शिकायत राज्यपाल समेत उच्च शिक्षाधिकारियों से की थी।
आरोप है कि नियुक्तियों में मानक का प्रयोग नहीं किया गया, साथ ही एक विशेष जाति के लोगों की भर्ती की गई। इस मामले की जांच राजभवन व उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कराई गई थी। इसी को लेकर जून 2022 में तत्कालीन कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने अचानक राजभवन जाकर इस्तीफा दे दिया था।
जबकि चर्चा थी कि उनसे इस्तीफा लिया गया है। उनकी जगह पर प्रयागराज के राजेंद्र सिंह रज्जू भैया राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश सिंह को अवध विश्वविद्यालय का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया था। इसके बाद से ही इन नियुक्तियों के रद्द होने की संभावना जताई जा रही थी।
गुरुवार को अचानक विवि कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई, जो देर शाम तक जारी रही। सूत्रों के अनुसार बैठक में पूर्व में हुई 9 नियुक्तियों में सात को रद्द किए जाने पर चर्चा की गई। फिलहाल अविवि प्रशासन ने इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है।
कुलपति प्रो. अखिलेश सिंह, रजिस्ट्रार उमानाथ सिंह से बात करने के लिए कई बार कॉल की गई, साथ ही मैसेज किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मुख्य नियंता प्रो. अजय प्रताप सिंह ने अपने को दीपोत्सव कार्यक्रम में व्यस्त बताया।