शुजागंज में सरयू के किनारे होती कटान।
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सरयू की उफान मंगलवार को थम तो गई मगर कटान और तेज हो गई है। नदी अभी भी लाल निशान से सात सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। जलस्तर में थोड़ा गिरावट के बाद अब कछार के क्षेत्रों में कटान का खतरा बेहद गंभीर हो गया है। चिर्रा खजुरी व अयोध्या-बिल्वहरिघाट बंधा भी संवेदनशील हो गया है।
राजस्व विभाग के कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में कैंप कर हालात पर नजर रख रहे हैं। लगभग सप्ताह भर से नदी के जलस्तर में गिरावट के साथ वृद्धि भी दर्ज की जा रही है। दो दिनों से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था लेकिन सोमवार की शाम लगभग आठ बजे नदी का जलस्तर 92.850 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया।
मंगलवार को दोपहर 12 बजे के बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। तेजी से बढ़ते जलस्तर से नदी में आई बाढ़ से कछार के दर्जन भर से अधिक गांव पानी से घिरे हैं। जलस्तर में ठहराव के बाद शुरू हुई गिरावट से जलस्तर लाल निशान के करीब पहुंच गया है।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, नदी का जलस्तर सोमवार की शाम आठ बजे 92.850 मीटर पर पहुंच कर स्थिर हो गया था। मंगलवार को सुबह 11 बजे तक जलस्तर स्थिर रहा लेकिन दोपहर 12 बजे से जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई है। बताया कि शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 92.800 मीटर तक पहुंच गया।
बुधवार को नदी का जलस्तर 92.700 मीटर तक पहुंचने की संभावना है। नदी के जलस्तर में गिरावट से कछार के क्षेत्रों में कटान तेज हो गई है। पूरा व मया ब्लॉक के मड़ना पिपरी संग्राम, बलुइया, मूड़ाडीहा, रामपुर पुआरी, उरदहवा के साथ ही रुदौली व सोहावल के कछार से सटे गांव की खेती व आबादी की जमीन कटान से नदी की धारा में समा रहे हैं।