नोटबंदी के 21वें दिन देहात इलाकों में लगातार करेंसी संकट से लोग मंगलवार को बैंकों पर बेकाबू होते गए। अमानीगंज में जैसे ही प्रबंधन ने कहा कि आज भी कैश नहीं है तो लोग आक्रोशित हो गए। बैंक का ताला नहीं खुलने दिया जबकि हैदरगंज में नो कैश की बात पर लोग हंगामा करने लगे। पुलिस फोर्स ने आकर घंटों मशक्कत के बाद स्थिति संभाली।
बीकापुर, तारुन, रुदौली, सोहावल, मवई, मिल्कीपुर आदि इलाकों में भी बेहाबू भीड़ को पुलिस की मदद से संभालना पड़ा है। इस बीच लीड बैंक मैनेजर ओपी शुक्ला ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में हालत बहुत खराब है, चेस्ट से हो रही डिमांड का 25 फीसदी ही कैश बड़ी मुश्किल से मिल रहा है। लोगों को कुछ कैश देकर हालात संभालनी पड़ रही है।
नोटबंदी के तीन सप्ताह हो चुके हैं, मगर नकदी संकट बरकरार है। शहर में बड़े बैंकों में चेस्ट से 60 फीसदी तक धन मिलने से जैसे-तैसे भुगतान संभल गया है। मगर मंगलवार को देहात इलाकों में नोटबंदी के बाद से ग्रामीण बैंकों से नकदी भुगतान बंद किए जाने से आक्रोेशित लोग बेकाबू होने लगे।
अमानीगंज क्षेत्र के ग्रामीण बैंकों में पैसा न होने के कारण ग्रामीणों की लंबी कतारें सुबह छह बजे से लग गईं। सुबह 8 बजे से ही क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक गद्दोपुर में सैंकड़ों लोगों ने लाइन लगाई, इसी बीच आए शाखा प्रबंधक हीरालाल ने जैसे ही कैश संकट गिनाया। भीड़ ने उन्हें ताला खोलकर बैंक के अंदर जाने ही नहीं दिया।
आक्रोशित भीड़ ने दोपहर 2 बजे तक बैंक का ताला नहीं खुलने दिया और किसी भी बैंककर्मी को ताला खोलकर बैंक के अंदर नहीं जाने दिया। हालात देख पुलिस भी दूर रही। शाखा प्रबंधक हीरालाल का कहना है कि कैश पर्याप्त न होने से दिक्कतें आ रही हैं।कैश संकट से क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अमानीगंज व खंडासा समेत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अमानीगंज व सहकारी बैंक से भी लोग वापस किए गए।
हैदरगंज प्रतिनिधि के अनुसार मगंलवार सुबह से लाइन लगाए खाताधारकों का सब्र टूट गया और नारेबाजी कर बैंक के चैनल को बंद कर दिया। थाने की पुलिस ने पहुंचकर भीड़ को तितर बितर किया। बड़ौदा पूर्वी बैंक जाना बाजार में खाता धारकों ने जमकर हंगामा किया।
बीकापुर प्रतिनिधि के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा शाहगंज में मंगलवार सुबह निकासी नहीं हुई तो कतार में खड़े लोग बेकाबू हो गए। यही हाल इस बैंक की बीकापुर, तोरोमाफी शाखा का रहा। मया बाजार प्रतिनिधि के अनुसार बैंकों में लंबी लाइनें लग रहीं हैं। लोग खाली हाथ लौटने को विवश हैं।