अयोध्या। रामजन्मभूमि में गर्भगृह का निर्माण कार्य 70 फीसदी पूरा हो चुका है। अब बीम व छत निर्माण की तैयारी भी तेज होने लगी है। इसके लिए परिसर में वंशी पहाड़पुर के पत्थरों की खेप लगातार आ रही है। इन्हें रामजन्मभूमि में रखवाया जा रहा है। वहीं रामलला की अचल मूर्ति के लिए जयपुर, राजस्थान से एक और पत्थर मंगलवार देर शाम अयोध्या पहुंचा।
रामलला की अचल मूर्ति के लिए अब तक देश-विदेश से आठ पत्थर पहुंच चुके हैं। इनमें नेपाल की गंडकी नदी से दो, कर्नाटक के मैसूर से दो, राजस्थान से तीन पत्थर आ चुके हैं। जल्द ही दक्षिण भारत से भी एक पत्थर आने की संभावना है।
राजस्थान से मंगलवार शाम शिला लेकर पहुंचे सत्य नारायण पांडेय के अनुसार, यह पत्थर मकराना का है। जिसे 40 वर्ष पहले खरीदा गया था। 100 पत्थरों में से एक पत्थर को चुनकर अयोध्या लाया हूं। यह पत्थर कभी खराब नहीं होने वाला है। बताया कि अयोध्या के कनक भवन में भी मकराना की मूर्ति स्थापित है, जो वर्षों से भव्यता की मिसाल है।
उधर भूतल के बीम व छत के निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी है। भूतल के सभी 190 स्तंभ लगाए जा चुके हैं। इन्हें जोड़ने का काम भी अंतिम चरण में है। इसके बाद बीम ढाली जाएगी फिर उसके ऊपर छत ढालने का काम होगा।
ट्रस्ट के अनुसार, बीम व छत के लिए आवश्यक लाल पत्थरों की आपूर्ति तेज हो गई है। बीम के जो पत्थर रामसेवकपुरम में तराशे जा चुके हैं उन्हें रामजन्मभूमि में पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया है।
पांच मार्च को संत-धर्माचार्य देखेंगे मंंदिर की प्रगति
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा समय-समय पर विशिष्ट जनों को राममंदिर निर्माण की प्रगति से अवगत कराया जाता है। अयोध्या आने वाले विशिष्ट मेहमानों, मीडिया कर्मियों को ट्रस्ट प्रगति से लगातार अवगत कराता रहता है।
इसी क्रम में रामनगरी के संत-धर्माचार्यों को भी पांच मार्च को रामजन्मभूमि में बुलाकर उन्हें मंदिर निर्माण की प्रगति से अवगत कराया जाएगा। इसके लिए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा संतों को आमंत्रण भेजा जा रहा है।