अयोध्या। गोरखपुर-लखनऊ हाईवे पर माझा बरहटा गांव में स्थित अयोध्या धाम बस स्टेशन की निष्प्रयोज्यता का असर दिखने लगा है। सिविल लाइन स्थित अयोध्या बस स्टेशन में पर्याप्त जगह न होने के कारण यहां बसों के खड़ा करने में दिक्कतें आ रही हैं। साथ ही रामपथ निर्माण के चलते यात्रियों की संख्या भी कम हो गई है। इसी वजह से गत फरवरी में डिपो आईं 10 नई बसों में से आठ बसों को कानपुर डिपो में अटैच कर दिया गया है।
करीब 14 करोड़ की लागत से पांच एकड़ भूमि में बने अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अयोध्या धाम बस स्टेशन का संचालन शुरू हुए करीब एक वर्ष का समय बीत चुका है। यहां गोरखपुर से लखनऊ की बसें तो पहुंच जाती हैं, लेकिन हाईवे पर कट या अंडरपास न होने से लखनऊ, सुल्तानपुर, बाराबंकी, अंबेडकरनगर आदि जिलों से आने वाली बसों का आवागमन इस स्टेशन पर नहीं हो पाता है। इसी बस स्टेशन से सटी नौ एकड़ भूमि पर 219 करोड़ की लागत से अंतरराज्यीय बस स्टेशन बनना भी प्रस्तावित है। इन दोनों जगहों पर 500 से ज्यादा बसें खड़ी हो सकती हैं, लेकिन वर्तमान में इसकी उपयोगिता न के बराबर रह गई है। अयोध्या डिपो में कुल 119 बसें थीं। जगह के अभाव में इस डिपो में आई आठ नई बसों को मुख्यालय की ओर से वापस ले लिया गया है।
परिचालकों का अभाव भी बस संचालन में पड़ रहा बाधा
अयोध्या परिक्षेत्र में परिचालकों का भी अभाव है। परिक्षेत्र में कुल 314 बसें हैं, जबकि परिचालकों की संख्या 550 है। सूत्रों के अनुसार, इनमें ज्यादातर संविदा परिचालक हैं, जो प्रतिदिन नहीं आते हैं। वर्तमान में 80 परिचालकों की आवश्यकता जताई गई है। इसके लिए क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने आउटसोर्सिंग कंपनी को पत्र लिखा है। उनका कहना है कि एक सप्ताह में परिचालकों के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या डिपो की आठ बसों को कानपुर डिपो में अटैच किया गया है। मंडल में मार्च 2024 तक 60 नई बसों को चलाने की योजना है, इस पर काम किया जा रहा है।