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राममंदिर की नींव निर्माण के लिए हुआ अनुष्ठान

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अयोध्या। राममंदिर निर्माण के लिए नींव खोदाई का काम पूरा हो गया है। अब नींव भराई शुरू करने के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने रामजन्मभूमि परिसर में गर्भगृह स्थल पर सोमवार को वैदिक विधिविधान पूर्वक पूजन किया।
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इसके साथ ही नींव के लिए खोदे गए करीब 40 फीट गड्ढे को समतल करने का काम शुरू कर दिया गया है। इस कार्य में करीब 15 दिन लगेंगे। इसके बाद अप्रैल माह से नींव भराई का काम शुरू होगा, जो कि अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा।
राममंदिर की नींव के लिए सोमवार को रामजन्मभूमि परिसर में गणेश व विश्वकर्मा भगवान की पूजा-अर्चना की गई। बताया गया कि मंगलवार से खरमास लग रहा है। जिसका समापन 14 अप्रैल को होगा।
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ऐसे में नींव कार्य में बाधा न आए इसको देखते हुए सोमवार को पूजन कर नींव भराई के कार्य का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, महंत दिनेंद्र दास, बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र सहित आफिसियो ट्रस्टी जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की मौजूदगी में सोमवार को शुभ मुहूर्त 10:55 बजे पूजन का शुभारंभ हुआ।
विधिविधान पूर्वक हुए पूजन का समापन 11:20 पर संपन्न हुआ। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने राममंदिर निर्माण की प्रगति से पत्रकारों को अवगत कराते हुए कहा कि राममंदिर की नींव की खोदाई का कार्य पूरा कर लिया गया है।
पूजन अर्चन के बाद नींव के लिए खोदे गए 40 फीट गहरे गड्ढे के समतलीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया है। इस कार्य में करीब 15 दिन लगेंगे। इसके बाद अप्रैल से नींव भराई का काम शुरू किया जाएगा। हमारा मानना है कि अगस्त तक राममंदिर की नींव भराई का काम पूरा हो जाएगा।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राममंदिर के लिए जहां भूमिपूजन किया था। उसकी सरयू तल से ऊंचाई 105 मीटर है। बताया कि रडार सर्वे के बाद यह तय हुआ था कि गर्भगृह स्थल पर गहराई तक मलबा जमा है।
जिसके बाद मलबा हटाने का निर्णय लिया गया और 40 फीट तक खोदाई की गई। बताया कि 30 फीट की खोदाई पूरी होने के बाद हमें प्राकृतिक मिट्टी मिलने लगी थी।
इसलिए 40 फीट से ज्यादा गहराई तक खोदाई करने की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। 40 फीट तक लेबलिंग करने के बाद हम दो फीट और ऊपर जाएंगे। वहां से प्लेटफॉर्म का निर्माण शुरू होगा। ऐसे में सरयू तट राममंदिर के चौखट की ऊंचाई 107 मीटर हो जाएगी।
चंपत राय ने बताया कि इंजीनियरिंग फिलिंग प्रणाली से नींव भराई जाएगी। नींव की भराई में राख, अभ्रक, ककंरीट, मौरंग व कम से कम मात्रा में सीमेंट का प्रयोग किया जाएगा।
नींव भरने के लिए एक-एक फीट की 300 मिमी. की लेयर भरकर उस पर रोलर चलाया जाएगा। इस प्रणाली को वायब्रो रोलर कहा जाता है। राममंदिर की नींव में करीब 40 लेयर बनेंगी।
जब हम 107 मीटर की ऊंचाई पर पहुंच जाएंगे तब वहां से पत्थरों का काम शुरू होगा। वर्षा ऋतु से पहले नींव भराई का काम पूरा करने का लक्ष्य है।
चंपत राय ने सोमवार को हुए पूजन को लेकर कहा कि यह एक तरह से प्रायश्चित पूजन था। कहा रामलला के गर्भगृह स्थल की जमीन पर बड़ी-बड़ी मशीनों से खोदाई की गई। अब उस पर रोलर चलाया जाएगा।
फावड़े चलाए जाएंगे। हम धरती की पूजा माता के रूप में करते हैं। चूंकि गर्भगृह स्थल को लेकर भी हम सबकी आस्था है। कई मशीनें काम करेंगी ऐसे में एक तरह से प्रायश्चित पूजन किया गया है।
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