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काला नमक चावल सुधारेगा उत्तर प्रदेश की आर्थिक हालत

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अयोध्या। पूर्वी उत्तर प्रदेश के जनपदों के सुगंधित चावल की महक एक बार फिर से यूरोप व खाड़ी देशों तक पहुंचेगी। यह प्रदेश की आर्थिक हालत को बेहतर बनाने के साथ विदेशी मुद्रा का अर्जन करेंगी।
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इसके लिए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय को काला नमक की नई प्रजातियों पर शोध कराने का जिम्मा सौंपा है। एनडी विवि ने छह कृषि विज्ञान केंद्रों से इसके लिए अनुबंध किया है। ये सभी कृषि विज्ञान केंद्र पूर्वी उत्तर के 11 जनपदों में होने वाले काला नमक प्रजाति पर विशेष शोध कर पैदावार को बढ़ाने, पौधों की ऊंचाई को घटाने व सुगंध को बरकरार रखते हुए नई प्रजाति विकसित करेंगे।
1960 के दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश में 30-40 देशी सुगंधित धान की खेती होती थी, परंतु अब महज 5-6 से किस्में जिसमें काला नमक बस्ती व सिद्घार्थनगर, शक्कर चीनी गोंडा व बाराबंकी, लालमती बाराबंकी व अयोध्या, बादशाह पसंद सुल्तानपुर व रायबरेली व आदमचीनी वाराणसी व मिर्जापुर तक के बहुत छोटे क्षेत्रों तक सीमित हो गया है।
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अब संकट यह है कि कम पैदावार व अधिक समय के चलते किसान इन धान की प्रजातियों को लगाना नहीं चाहते हैं। इससे ये प्रजातियां विलुप्त होती जा रहीं हैं। इनके पौधे बड़े व सुगंधित होते हैं।
इस वजह से इन पर कीट व अन्य रोग लग जाते हैं। इससे भी बोआई के क्षेत्रफल में काफी गिरावट आई है। सुगंध व धान की गुणवत्ता के दृष्टिगत खाड़ी व यूरोपीय देशों में काला नमक चावल की मांग बढ़ती जा रही है। परंतु क्षेत्रफल व उत्पादकता कम होने के कारण मांग के सापेक्ष आपूर्ति संभव नहीं हो पा रही है। इसके चलते उत्तर प्रदेश को विदेशी मुद्रा कम अर्जित हो रही है।
ऐसे में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद ने काला नमक पर शोध किए जाने का निर्णय लिया है। परिषद ने शोध कार्य का जिम्मा आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि को दिया है।
शोध कार्य के लिए फसल अनुसंधान केंद्र मसौधा, कृषि विज्ञान केंद्र सिद्घार्थनगर, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली, महायोगी कृषि विज्ञान केंद्र गोरखपुर एवं कृषि विज्ञान केंद्र देवरिया को जिम्मा सौंपा गया है। इसमें काला नमक प्रजाति के पौधों की ऊंचाई कम करना, सुगंध को बरकरार रखना, उत्पादन को बढ़ाना, शीघ्र पकने वाली प्रजाति तैयार करना व फसल को कीटों के प्रति अवरोधी बनाना मुख्य कार्य है। इन सभी को विशेषताओं के साथ नई प्रजाति विकसित की जाएगी।
काला नमक पर शोध कर नई प्रजाति विकसित करने की योजना है। इसमें बोआई क्षेत्रफल को बढ़ाने के साथ शीघ्र तैयार होने वाली फसल के रूप में विकसित करना है। इस कार्य को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इससे काला नमक की विदेशों से होने वाली मांग को पूरा किया जा सकेगा। साथ इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
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डॉ. सौरभ दीक्षित, मुख्य अंवेषक, फसल अनुसंधान केंद्र मसौधा, अयोध्या
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