बैंकों पर हजार व पांच सौ के नोटों को बदलने का काम शुक्रवार से बंद होने के कारण कतारें घट गईं। जिले में सवा दौ सौ शाखाओं पर एक्सचेंज के लिए सभी काउंटर बंद कर दिए गए। इससे बैंककर्मी भी दो सप्ताह बाद राहत की सांस लेते दिखाई दिए। लेकिन शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक करेंसी संकट से हाहाकार बरकरार रहा।
शादी, कृषि और जरूरी काम से नगदी मिलने में लोगों को दुश्वारियां उठानी पड़ीं। एटीएम में भी नकदी संकट से लोग बैंरग लौटने को मजबूर रहे। उधर, पांच सौ के नोट का जलवा दवा की दुकानों, पेट्रोल पंप, रेलवे काउंटर, नगरनिकाय, बिजली बिल आदि सरकारी संस्थानों में कायम रहा। लेकिन हजार के नोट रखने वाले बैंकों में जमा करने के लिए कतारों में खड़े दिखे।
नोटबंदी के 17वें दिन भी लोगों की मुश्किलें कम होती नहीं दिखीं। बैंकों से लेकर एटीएम में नकदी संकट ने तमाम परिवारों को रुला दिया। खासकर शादी वाले घरों में परिवार व रिश्तेदार मिलकर भी जरुरत भर रकम का इंतजाम नहीं कर पा रहे हैं।
नोट बदलने का काम बंद होने के बावजूद चेक व विड्रॉल से जिले की कुल 225 शाखाओं में महज 100 पर ही हो सुचारू रूप से हो पाया। शहर में फिर इलाहाबाद बैंक कचहरी शाखा में कैश खत्म हो गया। कुल दो सौ एटीएम में से 150 अपग्रेड किए जाने के बाद भी नई करेंसी के अभाव में सन्नाटा रहा।
शहर समेत देहात के ज्यादातर एटीएम बंद पड़े रहे। सबसे खराब हालत देहात के तारुन, बीकापुर, रुदौली, परटंगा, सोहावल, गोसाइगंज, मिल्कीपुर आदि इलाकों में रही। शुक्रवार को पुष्पराज स्थित एचडीफसी बैंक के एटीएम पर पैसे की निकासी के लिए लगी लोगों की कतार रही।
बीओबी के एटीएम पर भी यही हाल रहा। विकासभवन के पीएनबी में विड्रॉल भरने वाले कतार में जूझते दिखे। भारतीय स्टेट बैंक में भी निकासी के लिए कतार रही। इलाहाबाद बैंक का एटीएम और रोडवेज स्थित एचडीएफसी बैंक का एटीएम बंद रहा।
रौजागांव में पंजाब नेशनल बैंक के शाखा प्रबंधक एच एस रावत ने बताया कि पांच सौ व हजार के नोटों में अभी तक पांच नोट पांच सौ के नकली पाये गये हैं। इसे तुरंत लाल पेन से क्रॉस लगा दिया गया। बीकापुर में एटीएम से निकासी न होने से उपभोक्ताओं में मायूसी रही।
कस्बे में स्थित बीओबी, केनरा, इंडियन, आईसीआईसीआई, एसबीआई सहित क्षेत्र के ग्रामीण बाजारों में स्थित विभिन्न बैंकों के एटीएम से निकासी अभी नहीं शुरू हो सकी। बैंकों की शाखाओं मेें कैश की किल्लत के चलते लोगों को शादी विवाह, दवा उपचार, खेती किसानी सहित जरूरी कार्यों के लिए पर्याप्त भुगतान नहीं मिल पा रहा है।