ऐसे में आंखों के सामने फसल चट होती देखकर किसान परेशान हैं। मगर प्रशासन, कृषि व वन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
कृषि विभाग दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए हर साल लाखों रुपये फूंक रहा है। मगर वनरोजों के आतंक के आगे ये प्रयास शून्य साबित हो रहे हैं। इन्हें काबू करने के उपायों पर शासन-प्रशासन मौन है।
वन विभाग भी आगे नहीं आ रहा है। मिल्कीपुर के किसान जाफर, सुलेमान, द्वारिका प्रसाद, शिवयज्ञ आदि कहते हैं कि प्रशासन-शासन वनरोज के गाय प्रजाति का नहीं होने का प्रचार जोर-शोर से तो करता है, फिर भी उसे मारने पर रोक है।
कृषि विभाग की ओर से आइसोपाम योजना में किसानों को अरहर, मूंग, उड़द, चना, मटर और मक्के के उन्नतशील बीज मिलते हैं। मगर खेतों में हरियाली आने से पहले ही किसानों की खुशी काफूर हो जाती है। मटर, अरहर, चना व मूंग जैसी कम लागत में अच्छी उपज देने वाली फसलों को वनरोज पनपने ही नहीं देते।
रात-दिन की रखवाली के बावजूद फलियां लगने की नौबत ही नहीं आती। बड़ैल तो आलू तक खोदकर खा जाते हैं। वनरोज तिलहनी फसलों को गंध, चने को लोनी (खट्टेपन) और गन्ना-धान को पत्तियां अरर (कंटीली) होने के कारण नहीं छूते थे। मगर अब वे इन पर भी कहर ढा रहे हैं।
ये सच है कि नीलगायों और जंगली सूअरों से फसल को नुकसान हो रहा है। इन्हें मारने के लिए अनुमति लेनी होती है। प्रशासन और वन विभाग ही इस बारे में किसानों के हित में कुछ कर सकते हैं।
डॉ. राजेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी फैजाबाद
दिन-रात लगाते हांका
जंगली जानवरों से फसल बचाना मुश्किल हो गया है। फसल बचाने के लिए दिन-रात हांका लगाना पड़ता है। वनरोजों के झुंड इतने के बाद भी फसलों पर कहर ढा रहे हैं।-आलोक कुमार पांडेय, किसान
दलहनी फसल बोना छोड़ा
वनरोज पलक झपकते ही पूरी फसल चट कर जाते हैं। कोई इन्हें मारे तो कैसे? जेल जाने की नौबत आ जाती है। ऐसे में दलहनी फसल बोना ही छोड़ दिया है। अंजनी कुमार उपाध्याय, किसान
दूसरी फसल बचाना भी मुश्किल
दलहनी ही क्या, अब तो आलू, गेहूं, सब्जियाें तक की पैदावार करना मुश्किल भरा है। क्षेत्र में वनरोज व बड़ैलों ने कहर बरपा रखा है। सभी किसान इनसे परेशान हैं। रामगनेश मौर्य, किसान
प्रशासन करे कोई उपाय
फसलों को हानि पहुंचाने वाले इन जानवरों को मारने पर रोक है। हर कोई इन्हें हाथ लगाने से डरता है। फसल बचाने के लिए शासन-प्रशासन ही उपाय करे। राघवेंद्र पांडेय, किसान