रामनगरी के सरयू तट पर स्थित कोरियाई पार्क का स्वरूप अब न सिर्फ भव्य होगा, बल्कि यह अयोध्या आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। दीपोत्सव में कोरिया गणराज्य के प्रथम लेडी की मौजूदगी में रखी गई कोरियाई पार्क के विस्तारीकरण योजना की आधारशिला अब मूर्त रूप लेने की तैयारी में हैं।
ढाई एकड़ में 21.92 करोड़ खर्च कर कोरियाई रानी हौ पार्क का स्वरूप निखेगा। नया पार्क प्लाजा, मेडिटेशन सेंटर सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। पार्क में दोनों देशों की वास्तुकलाओं का भी संगम दिखेगा, यह पार्क देशी एवं विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हो, ऐसा प्रयास है।
अयोध्या दौरे पर आई कोरियाई टीम ने बृहस्पतिवार को महारानी हो को कोरियाई पार्क में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह विश्वास दिलाया कि कोरयाई सरकार भारत और कोरिया के संबंधों को नित नई ऊंचाई प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इसी क्रम में प्रदेश सरकार द्वारा कोरियाई पार्क के विस्तार एवं संदुरीकरण के लिए 21.92 करोड़ का बजट भी जारी कर दिया गया है। कोरियाई पार्क अब किंग पवेलियन, क्वीन पवेलियन, मेडिटेशन सेंटर, पाथवे, पार्किंग सहित अन्य सुविधाओं से युक्त होगा।
किंग व क्वीन पवेलियन के जरिए अयोध्या की राजकुमारी की नदी व समुद्र से कोरिया की यात्रा की गाथा को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया जाएगा। किस तरह राजकुमारी हो ने कर्क देश के राजा किम सुरो से विवाह किया और यहीं रह गई। पार्क में रानी हो के बारे में जानकारी देने के लिए कई माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा।
दोनों देशों की वास्तुकला का संगम भी पार्क में दिखेगा। अवध की वास्तुकला व संस्कृति का प्रस्तुतीकरण व कोरिया के गिम हे सिटी की पहचान भी दर्शायी जाएगी। कोरिया गणराज्य के महारानी हौ के वशंजों ने 2001 में सरयू तट पर रानी हो का भव्य स्मारक बनवाया।
स्मारक में लगे शिलालेख का पत्थर कोरिया से मंगवाया गया है। कोरिया के पौराणिक दस्तावेज साम गुक युसा में उल्लिखत कथा के अनुसार अयोध्या की राजकुमारी के पिता के स्वप्न में स्वयं ईश्वर प्रकट हुए और उन्होंने राजकुमारी के विवाह के लिए किम हे शहर भेजा, जहां सूरीरत्ना का विवाह राजा सूरो के साथ संपन्न कराने को कहा।
किम हे राजवंश के नाम पर ही वर्तमान कोरिया का नामकरण हुआ है। कोरिया के लोगों का मानना है कि सुरीरत्ना और राजा सुरो के वशंजों ने ही सातवीं शताब्दी में कोरिया के विभिन्न राजघरानों की स्थापना की थी। इनके वशंजों को करक वंश का नाम दिया गया।
एक सप्ताह के भीतर कोरियाई टीम 11 मार्च को दूसरी बार अयोध्या आएगी। अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक रामतीरथ ने बताया कि करीब 40 सदस्यीय दल 11 मार्च की शाम अयोध्या पहुंचेगा। जहां रात्रिकाल राजसदन में दल का स्वागत सत्कार किया जाएगा।
12 मार्च की सुबह कोरियाई दल सरयू तट स्थित रानी हो के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करेगा साथ ही अधिकारियों के साथ कोरियाई पार्क के विस्तारीकरण पर चर्चा होगी।
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बताया कि कोरियाई पार्क को भव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
पार्क का विस्तार कुल ढाई एकड़ में होना है। जिसकी डिजाइन पर कोरियाई टीम ने पहले ही मुहर लगा दी है। 21.92 करोड़ का बजट भी सरकार ने जारी कर दिया है। नया पार्क आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। अगले कुछ दिनों में इस पर काम शुरू हो जाएगा।