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रामनगरी की सांस्कृतिक विरासत से भी रूबरू होंगे पर्यटक

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अयोध्या स्थित रामनगरी का विहंगम दृश्य। - फोटो : FAIZABAD
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नितिन कुमार मिश्र
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अयोध्या। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले के बाद जहां राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है, वहीं राममंदिर निर्माण से पूर्व अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक आभा निखारने की भी कवायद तेज कर दी गई है। राममंदिर के बाद सांस्कृतिक केंद्र के रूप में अयोध्या का वैभव निखरेगा, इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी एवं योगी सरकार त्रेतायुग जैसी नई अयोध्या का सपना साकार करने की तैयारी में जुट गई है।
प्रदेश की योगी सरकार की त्रेतायुग जैसी दीपावली ने तीन साल में अयोध्या में पर्यटकों को आकर्षित करने से लेकर सुख-सुविधाएं देने की शुरूआत की थी। अब राममंदिर निर्माण से पहले अयोध्या का सजाने संवारने का काम भी गति पकड़ता नजर आ रहा है। सरकार का ध्यान अयोध्या के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर तो है ही इसके साथ ही साथ ही सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी अयोध्या को विकसित करने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।
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इसके तहत अयोध्या में जहां भगवान राम की विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित होने जा रही है। वहीं अयोध्या शोध संस्थान को हाईटेक किए जाने की तैयारी है। यहां लोग कहीं से भी ऑनलाइन रामलीला देख सकेंगे। भजन संध्या स्थल रामनगरी में सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन का प्रमुख केंद्र बनेगा। इसी तरह रामलीला एकेडमी खोलने की भी तैयारी है जिससे युवा पीढ़ी को राम की गाथा से जोड़ा जा सके, अन्य कई योजनाएं अयोध्या को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करेंगी।
ऑनलाइन देख सकेंगे रामलीलाओं का मंचन
अयोध्या शोध संस्थान को भी हाईटेक करने की तैयारी है। अयोध्या शोध संस्थान 17 करोड़ से डुिजिटल होने जा रहा है। इससे यहां रखी कलाकृतियों को अब लोग एक क्लिक से ऑनलाइन देख सकेंगे। साथ ही विदेशों में होने वाली रामलीलाओं का मंचन भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
सरकार ने 4.50 करोड़ की धनराशि स्वीकृत भी कर दी है। योजना की डिजाईन भी तैयार है, शीघ्र ही डिजिटलीकरण का काम भी शुरू हो जाएगा। यहां इंडोनेशिया, अमेरिका, त्रिनिडाड, श्रीलंका, थाईलैंड, मलेशिया, सूरीनाम, रूस, लाओस, फिजी आदि देशों की रामलीला सामग्री, संग्रह हस्तशिल्प में देश देश के विभिन्न कोने से रामकथा का संकलन, टेरोकोटा के माध्यम से विभिन्न शैलियों में रामकथा अंकन तथा विभिन्न चित्र शैलियों में रामकथा का चित्रांकन आकर्षण का केंद्र है। लोग इन्हें अब आनलाइन देख सकेंगें। पुस्तकालय में अयोध्या के हेंस बेकर, अवध गजेटियर, विभिन्न प्रदेश के गजेटियर तथा तुलसी कृत लगभग 200 ग्रंथ शोधार्थियों हेतु उपलब्ध हैं।
धनुषाकार भजन संध्या स्थल का करीब 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शीघ्र ही भक्तों एवं श्रद्धालुओं के लिए सुलभ होगा। पांच हजार की क्षमता वाले भजनसंध्या स्थल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। सपा सरकार की इस योजना को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अनुमोदित करते हुए इसके बजट में 6 करोड़ की वृद्धि की थी। प्रस्तावित योजना मई 2018 तक पूरी होनी थी लकिन बजट बढ़ने के बाद कार्यदाई संस्था रिवाइज स्टीमेट भेजा गया और कार्य में देरी हुई। हालांकि भजन संध्यास्थल का कार्य अब पूर्णता की ओर है। भजन संध्यास्थल स्टेडियम नुमा बना है, बीच में ग्रीनरी विकसित की गई है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए लाईंट साउंड सिस्टम भी लगाए जाने की योजना तैयार की जा चुकी है।
अयोध्या। रामनगरी के सरयू नदी के तट पर बने भारत और कोरिया के ऐतिहासिक संबंधों का साक्षी कोरियाई पार्क अब पर्यटन कर केंद्र बनेगा। इसके विस्तारीकरण का काम चल रहा है। ढ़ाई एकड़ में 24.66 करोड़ खर्च कर कोरियाई पार्क का स्वरूप निखरेगा।
विस्तारित कोरिया पार्क का स्वरूप अब न सिर्फ भव्य होगा, बल्कि यह भारत-कोरिया संबंधों की गौरव गाथा बयां करेगा साथ ही अयोध्या आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। नया पार्क प्लाजा, मेडिटेशन सेंटर सहित अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। ढ़ाई एकड़ में बनने वाले पार्क में दोनों देशों की वास्तुकलाओं का संगम दिखेगा, यह पार्क देशी एवं विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हो, ऐसा प्रयास है।
कोरियाई पार्क अब किंग पवेलियन, क्वीन पवेलियन, मेडिटेशन सेंटर, पाथवे, पार्किंग सहित अन्य सुविधाओं से युक्त होगा। वास्तुकारों ने किंग सूरो के ईश्वरीय प्रतिनिधि होने की परिकल्पना को साकार करते हुए गोल्डेन एग के साथ महारानी हौ की अयोध्या से कोरिया के बीज जलयात्रा के वृतांत का दृश्यांकन किया है।
अयोध्या में स्थापित होने जा रही विश्व की सबसे ऊंची 251 मीटर की श्रीराम प्रतिमा रामनगरी की धार्मिक आभा बढ़ाने का काम करेगी। इसके लिए जमीन खरीदने का प्रस्ताव हो चुका है पहली किश्त में 117 करोड़ का बजट भी स्वीकृत हो चुका है। राममंदिर के साथ-साथ विशाल श्रीराममूर्ति भी अयोध्या का गौरव बढ़ाएगी।
श्रीराम की प्रतिमा के अलावा आस-पास के इलाके को पर्यटन के अनुकूल बनाने की भी योजना है। इस परिसर को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने की तैयारी चल रही है। अधिग्रहीत भूमि पर डिजिटल म्यूजियम और रीवर फ्रंट श्रद्धालुओं के आकर्षण के प्रमुख केंद्र होगा। भगवान श्रीराम पर आधारित डिजिटल म्यूजियम, इंटरप्रटेशन सेंटर, लाइब्रेरी, पार्किंग, फूड प्लाजा, लैंडस्केपिंग समेत पर्यटकों के लिए अन्य आकर्षण होंगे। इस योजना को 2022 तक पूर्ण करने की तैयारी है।
अयोध्या अब रामलीला एकेडमी खोलने की भी तैयारी हो चुकी है। रामलीला एकेडमी की स्थापना के लिए रामनगरी में जमीन देखी जा रही है। इस योजना को 2022 तक मूर्त रूप देने की तैयारी है। रामनगरी में रामलीला एकेडमी की स्थापना से रामलीला के वैश्विक स्वरूप पर शोध करने में सहायता मिलेगी।
राम की संस्कृति के अध्ययन के लिए कोर्सेज भी चलाए जाएंगे। साथ ही रामलीला आधारित म्यूजियम भी विकसित करने की योजना है। अयोध्या शोध संस्थान के व्यवस्थापक रामतीरथ बताते हैं कि प्रदेश सरकार ने इसके लिए 10 करोड़ का बजट भी निर्धारित कर दिया है। जमीन देखी जा रही है जमीन चिन्हित होेते ही उसका अधिग्रहण कर काम शुरू कर दिया जाएगा। एकेडमी में एक म्यूजियम भी स्थापित किया जाएगा जिसमें रामलीला के अलग-अलग संदर्भों को विभिन्न शैलियों में प्रस्तुत किया जाएगा।
अयोध्या में रामायण सर्किट योजना के अंतर्गत राम, रामायण और अयोध्या की डिजिटल प्रस्तुति साकार होने जा रही है। इसके लिए रामकथा संग्रहालय में नया आडीटोरियम बनेगा। संस्कृति विभाग ने इसकी डिजाइन तैयार कर ली है। जल्द ही डिजीटल रामायण गैलरी में राम की गाथा जीवंत प्रतीत होती दिखेगी। रामकथा संग्रहालय में ही इसके लिए आडिटोरियम बनाने का निर्णय लिया गया है, यह रामायण की थीम पर आधारित होगा।
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जहां आडियो, वीडियो वजिुुअल के माध्यम से रामायण के चरित्रों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस योजना के तहत अभी तक जो श्रद्धालु रामायण को किताबों में और टीवी सीरियल के माध्यम से देखा करते थे, वह सारे प्रसंग नए अंदाज में यहां देख सकेंगे। बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीन पर राम की गाथा का विविध माध्यमों से प्रदर्शन पर्यटकों को भी लुभाएगा।
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