अयोध्या। राम व रामायण के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले देश मॉरीशस के पाठ्यक्रम में अब रामलीला शामिल होगी। अयोध्या शोध संस्थान के आग्रह पर मॉरीशस सरकार ने इसकी कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है।
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. योगेंद्र प्रताप सिंह ने मॉरीशस सरकार के शिक्षामंत्री से मिलकर भारत और मॉरीशस के बीच एमओयू किए जाने तथा वहां के पाठ्यक्रम में रामायण, रामलीला को शामिल करने का आग्रह किया। जिस पर मॉरीशस सरकार ने अपनी सहमति भी प्रदान कर दी है।
राम की गाथा विश्व के कोने-कोने में पहुंच चुकी है। यह अवधारण महज कागजी नहीं है बल्कि आज विश्व के 70 देशों में राम की गाथा की व्याप्ति इसकी पुष्टि करती है।
सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि विदेशी कलाकार अब हिंदी में रामलीला मंचन की कला सीखने को आतुर हैं। जिसको देखते हुए भारत सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा विदेशी कलाकारों को प्रशिक्षित करने के लिए टीम भेजी जा रही है।
इसी क्रम में मॉरीशस के कलाकारों को प्रशिक्षण देकर अभी हाल ही में अयोध्या की टीम लौटी है। मॉरीशस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि अयोध्या शोध संस्थान के सुझाव पर मॉरीशस के पाठ्यक्रम में रामलीला केा शामिल करने का रास्ता साफ हुआ है। इसके लिए शीघ्र ही भारत और मॉरीशस के बीच एमओयू किए जाने की योजना है।
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह ने बताया कि रामायण, रामलीला से संबंधित विभिन्नआयोजन/प्रतियोगिताएं कराए जाने के संबंध में मॉरीशस सरकार के शिक्षा मंत्री के समक्ष सुझाव रखे गए जिसे उन्हें बहुत ही गंभीरता से लिया। इस अवसर पर मॉरीशस रामायण सेंटर के अध्यक्ष पंडित राजेंद्र अरुण भी मौजूद रहे।
वहीं अयोध्या से गई टीम ने मॉरीशस के कलाकारों को हिंदी में रामलीला मंचन के गुर सिखाए तो मॉरीशस के कला एवं संस्कृति मंत्रालय के ऑडिटोरियम में वहां के बच्चों एवं युवाओं को रामलीला से संबंधित मेकअप एवं वेश-भूषा आदि का प्रशिक्षण भी दिया।
मॉरीशस में मानस के अखंड पाठ व समूह गान की बहुलता
मॉरीशस के लोगों के लिए राम और रामकथा प्रेरणास्रोत है। रामकथा पर आधारित मंचनों, भावपूर्ण नृत्य से रामलीला को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मॉरीशस सरकार विभिन्न योजनाएं बना रही है।
अयोध्या शोध सँस्थान के निदेशक वाईपी सिंह बताते हैं कि राम व रामायण के प्रति मॉरीशस वासियों में अगाध निष्ठा है। जब हमारे पूर्वज भारत से जाकर मॉरीशस में बसे थे और उन्हें वहां पांच वर्ष तक रुकने की शर्त रखी गई थी, तब सिर्फ यही विश्वास उन्हें सहारा देता रहा कि राम ने चौदह वर्ष का बनवास काटा था, तो उन्हीं के वंशज होकर हम भी पांच वर्ष का वक्त आसानी से गुजार लेंगे।
भारत से आते समय उनके पास रामचरित मानस व हनुमान चालीसा ही थी। मॉरीशस में मानस गान प्रतियोगिताओं सहित मानस पर प्रश्रोत्तरी, अखंड पाठ और समूह गान की बहुलता है। मॉरीशस के लोगों का मानना है कि मानस ही नई पीढ़ी को संस्कार से जोड़े रखेगा।