संस्कृति विभाग से संचालित अयोध्या शोध संस्थान में लगभग 11 वर्षों से चल रही अनवरत रामलीला व व्यास परंपरा की श्रीरामकथा प्रवचन पर ग्रहण लग गया है।
संस्थान के व्यवस्थापक की मौत के बाद दोनों आयोजनों के संचालन को लेकर विभाग में ऊहापोह की स्थिति है। निदेशक ने दोनों आयोजनों के संचालन को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं।
बता दें कि अयोध्या शोध संस्थान ने पुरातात्विक व ऐतिहासिक विषयों पर शोध कार्य व उनके प्रकाशनों के साथ ही 19 अप्रैल 2004 में शुरूआत की थी।
यहां चल रही रामलीला ने नौ सालों तक अनवरत मंचन किया। इसी के सफलता को देखते हुए शासन ने 21 दिसंबर 2012 को अनवरत व्यास परंपरा पर आधारित श्रीरामकथा प्रवचन का मंचन भी शुरू किया।
हालांकि आठ साल 10 माह व 101 दिन की श्रीरामकथा के आयोजन पर लाखों रुपये के बकाए के चलते एक अप्रैल 2013 को ब्रेक लगा तो दो दिनों बाद यह पुन: शुरू हुई।
अब तक रामलीला मंचन ने 11 वर्षों का सफर तो व्यास परंपरा पर आधारित 1061 दिन के रामकथा प्रवचन के मंच पर 108 व्यासों ने 23 नवंबर तक प्रवचन किया।
बीते सोमवार को संस्थान के व्यवस्थापक अविनाश के संयोजन में दोनों कार्यक्रमों का अंतिम मंचन था। उनकी मौत के बाद दो दिनों से रामलीला व रामकथा का मंचन बंद रहा।
इसे लेकर संस्थान से जुड़े लोग यही कहते रहे कि अविनाश ही दोनों आयोजनों की संपूर्ण व्यवस्था का संचालन करते थे, आगे आयोजन कैसे होगा, यह विभागीय अफसर ही तय करेंगे।