बीकापुर। क्षेत्र के उमरनी पिपरी चौराहे पर नवरात्र के पूर्व अश्विन मास में होने वाले रामलीला मंचन की तैयारी शुरू कर दी गई है। यहां चार अक्तूबर से 11 दिवसीय रामलीला मंचन का शुभारंभ किया जाएगा। रामलीला मंचन में पड़ोसी गांव सूल्हेपुर निवासी मोहम्मद जहीर द्वारा पहले की तरह निर्देशक की भूमिका निभाई जा रही है। मोहम्मद जहीर करीब दो दशक से रामलीला मंचन में अहम योगदान निभाकर आपसी भाईचारा और सौहार्द की मिसाल कायम करते रहे हैं।
बीकापुर के सूल्हेपुर निवासी 65 वर्षीय मोहम्मद जहीर ने करीब 20 वर्ष पूर्व गांव के विश्राम वर्मा और कुछ युवकों के साथ रामलीला मंचन का शुभारंभ किया था। 20 साल से अपने गांव के पास उमरनी पिपरी चौराहे पर रामलीला मंचन में निर्देशन की भूमिका निभा रहे हैं। गांव के बच्चों और युवाओं को रामलीला के लिए वे प्रेरणास्रोत हैं। उन्हें वे तैयार कर मंचन कराते हैं। गांव से कुछ दूरी पर लकड़ी की गुमटी में एक छोटी सी सिलाई की दुकान करते हैं। लेकिन हर वर्ष उमरनी पिपरी चौराहे पर आयोजित रामलीला की तैयारी के लिए कुछ दिन तक अपनी सिलाई की दुकान बंद रखते हैं और पूरी तरह रामलीला मंचन में रम जाते हैं। अभिनय करने वाले स्थानीय कलाकारों को पात्र व अभिनय का गुर सिखाते हैं। उनकी प्रेरणा से गांव के मेहंदी हसन, गुड्डू सहित कुछ अन्य मुस्लिम युवक भी रामलीला में अभिनय करते रहे हैं।
प्रधान प्रतिनिधि शारदा प्रसाद वर्मा, विश्राम वर्मा, चंद्रभान शर्मा, विकास पाठक, नींबू लाल कनौजिया आदि बताते हैं कि यहां की रामलीला मोहम्मद जहीर के बगैर अधूरी मानी जाती है। उम्र अधिक हो जाने के बावजूद वे मंचन में हिस्सा लेते हैं, जिससे उनके परिवार के लोग प्रसन्नता जाहिर करते हैं। क्षेत्र के लोग भी उनकी भावना की पूरी कद्र करते हैं और उनके रामलीला मंचन के प्रति समर्पण की सराहना करते हैं।