अयोध्या। रामलला के हक में गत नौ नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से निर्णय आने के बाद रामलला के चढ़ावे में भी बड़ी वृद्धि हुई है। फैसले से पूर्व रामलला का चढ़ावा औसतन छह लाख रुपये मासिक था जो फैसले के बाद बढ़कर दस लाख रुपये तक पहुंच गया है।
अयोध्या में दिव्य-भव्य राममंदिर निर्माण की कल्पना से रामभक्त उत्साहित हैं। राममंदिर निर्माण के लिए हाल ही में ट्रस्ट बना है, अभी ट्रस्ट की बैठक भी नहीं हुई है, बावजूद इसके राममंदिर निर्माण के लिए बड़ी संख्या में दान दाता सामने आ रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ रामलला मंदिर में चढ़ावे में भी फैसला आने के बाद से डेढ़ से दो गुना वृद्धि हो गयी है। रामजन्मभूमि के अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि रामलला का दानपात्र हर 15 दिन के अंतराल पर खोला जाता है।
पहली बार माह की पांच तारीख को और दूसरी बार 20 तारीख को। 9 नवंबर को फैसला आने के बाद पहली बार 20 नवंबर को दानपात्र खोला गया तो छह लाख से अधिक रुपये निकले।
जहां गत दो-तीन वर्षों से प्रत्येक 15 दिन पर रामलला के दानपात्र से औसतन पौने तीन से सवा तीन लाख लाख रुपये ही निकलते थे। आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि फैसला आने के बाद छह बार रामलला का दानपात्र खोला जा चुका है और हर बार फैसले से पूर्व के मुकाबले तकरीबन डेढ़ से दो गुना अधिक राशि दानपात्र से निकली।
20 नवंबर के बाद पांच दिसंबर को रामलला के दानपात्र से पांच लाख रुपये निकले। इसके बाद के पखवारे में तीन लाख 24 हजार रुपये निकाले गए। पांच जनवरी को जब दानपात्र खुलाए तब चढ़ावे में पुन: तीव्र वृद्धि दर्ज की गई और इस पखवारे चढ़ावे की राशि छह लाख तक जा पहुंची। 20 जनवरी को दानपात्र से पांच लाख और पिछली बार यानी छह फरवरी को चढ़ावे की राशि चार लाख 89 हजार गिनी गई।