अयोध्या। राममंदिर के निर्माण के साथ इसके ग्लोबल महत्व को देखते हुए योगी आदित्यनाथ सरकार एक नई योजना पर काम कर रही है। प्रदेश सरकार ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण के नाम से शोधपरक प्रामाणिक दस्तावेज प्रकाशित करेगी।
प्रदेश की योगी आदित्यनाथ ने 85 लाख की इस योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पूरी दुनिया में रामायण गाथा का संकलन किया जाएगा। जिसमें विश्व की रामलीलाओं के दस्तावेजीकरण के साथ ही भगवान राम से जुड़ी हर चीज का संकलन किया जाएगा।
कार्ययोजना के तहत इंसाइक्लोपीडिया को 150 खंडों में प्रकाशित करने का प्लान तैयार किया गया है। जिसमें देश के सभी राज्यों और डेढ़ दर्जन दूसरे देश राम कथा पर सामग्री संकलित करेंगे और उन सभी को एक साथ जोड़कर प्रकाशित किया जाएगा।
सरकार इस प्रोजेक्ट के जरिए देश की युवा पीढ़ी को भगवान राम के चरित्र, आदर्श और उनकी यशगाथा को दस्तावेजों, तथ्यों और प्रमाणों को अनुसंधान के बाद पेश करना चाहती है। ताकि कहीं से किसी को भी कोई संशय न रह जाए। इस ग्रंथ के प्रकाशित होने के बाद राममंदिर के दर्शन के साथ देश-विदेश में भारतीय संस्कृति को प्रभु राम के माध्यम से वैश्विक स्तर पर विस्तार करने में मदद मिलेगी।
ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण में वैश्विक स्तर पर प्रभु राम की मूर्त और अमूर्त विरासत के तमाम पहलुओं को समेटा जाएगा। इसमें राम कथा से जुड़ी स्थापत्य कला मूर्तियां, चित्र संगीत, राम लीलाएं, हस्तशिल्प, साहित्य और सामाजिक जीवन शैली को भी जोड़कर प्रकाशन किया जाएगा।देश-विदेश में राम कथा सामग्री संग्रह और इसके शोध के लिए कमेटियां और संपादक मंडलों का गठन भी किया गया है।
अयोध्या शोध संस्थान के अलावा संस्कृति विभाग , केंद्र सरकार और कई अन्य संस्थाएं इसके प्रकाशन के लिए वित्तीय सहयेाग देंगी। फिलहाल 30 लाख रुपये भारत सरकार, 30 लाख रुपये अयोध्या शोध संस्थान और 25 लाख रुपये अभिलेखीकरण के मिलाकर 85 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया है।
रामायण देशों का बनेगा समूह
शोध संस्थान रामायण देशों का समूह बनाने पर भी काम कर रहा है। इसमें विदेश मंत्रालय की मदद ली जाएगी। दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व एशिया, मिस्त्र, यूरोप, अमरीका, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, कैरेबियन देश अध्ययन के दायरे में आएंगे। इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, सूरीनाम, त्रिनिदाद, गुआना, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस, मारीशस, केन्या आदि देश ग्रुप ऑफ रामायण नेशन में शामिल होंगे। भगवान राम और हनुमान के शिलालेख इटली और इराक में भी पाए गए हैं। अमरीका के होंडुरास के जंगलों में राम की मूर्ति मिली है। तमाम अन्य देशों में भी राम से जुड़े शिलालेख और पुरातात्विक चिह्न मिले हैं। इन सभी का अध्ययन और संकलन किया जा रहा है।
सभी देशों की रामलीलाओं का भी होगा दस्तावेजीकरण
योजना के अंतर्गत सभी देशों की रामलीलाओं का भी दस्तावेजीकरण किए जाने की योजना है। सन् 2005 में यूनेस्कों ने रामलीला को विश्व विरासत घोषित किया है। रामलीलाओं की अनेक शैलियां हैं जिसमें मैदानी रामलीला, मंचीय रामलीला, शौकिया रामलीला आदि। रामलीलाओं के दस्तावेजीकरण में सभी शैलियों की रामलीलाओं का इतिहास तथा विकास क्रमश: अंकित किया जाएगा। रामलीलाओं की प्रस्तुतियों में जन सहयोग की बड़ी भूमिका है। ऐसी स्थिति में जन सहभागिता के द्वारा रामलीलाओं के मंचन में समितियों का योगदान, कलाकारों का चयन उनके प्रशिक्षण की पद्घतियां कैसी हैं, इसका भी मूल्याकंन किया जाएगा।
ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण के नाम से शोधपरक प्रामाणिक दस्तावेज प्रकाशित करने की तैयारी शुरू कर दी गयी है। इस योजना पर काम करने की सहमति सीएम योगी आदित्यनाथ ने मई 2018 की बैठक में दी थी। अब पांच वर्षीय लक्ष्य बनाकर इसके प्रकाशन का प्लान तैयार किया गया है, इसके लिए 85 लाख का बजट निर्धारित किया गया है। इस योजना को लेकर कॉन्फ्रेंस के आयोजन और विदेशी संपर्क सूत्रों से वार्ता भी शुरू कर दी गई है।
डॉ.वाईपी सिंह, निदेशक, अयोध्या शोध संस्थान