अयोध्या। रामजन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन राममंदिर के गर्भगृह का मुख्य द्वार व शिखर स्वर्ण जड़ित होगा। रामलला का मुकुट सोने का होगा। आभूषण भी सोने-चांदी के होंगे। मंदिर निर्माण का अब तक लगभग 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है, निर्माण की लागत 1800 करोड़ रुपये आंकी गई है।
गर्भगृह के दरवाजे और खिड़कियों में चांदी का उपयोग होगा। राममंदिर के गर्भगृह में कुल नौ दरवाजे होंगे। श्रीराममंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने एक चैनल को दिए गए साक्षात्कार में बताया कि राममंदिर निर्माण में सोने-चांदी का उपयोग किया जाएगा।
ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार, राममंदिर में बड़ी मात्रा में चांदी का भी उपयोग किया जाना है। रामलला जिस सिंहासन पर विराजमान होंगे उसकी ऊंचाई लगभग तीन फीट होगी। इस पर भी चांदी की कारीगरी की जाएगी। राममंदिर निर्माण शुरू होते ही शुरू हुआ दान का भी सिलसिला आज भी जारी है।
हर रोज एक करोड़ का दान नकदी, आरटीजीएस, चेक व ऑनलाइन माध्यमों से आ रहा है। वहीं सोने-चांदी का भी दान भक्त लगातार करते रहते हैं। ट्रस्ट को अब तक करीब पांच सौ क्विंटल चांदी दान में मिल चुकी है। जनवरी में हरिद्वार-काशी मठ के उत्तराधिकारी स्वामी संयमेंद्र ने 167.4 किलोग्राम चांदी और 47.8 ग्राम सोना रामलला के चरणों में समर्पित किया है।
धार्मिक कार्यों के लिए होगा मंदिर का दूसरा तल
तीन मंजिला राममंदिर का भूतल इसी साल तैयार हो जाएगा। भूतल में रामलला चारों भाइयों के साथ विराजमान होंगे। यहां राम, सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न व हनुमान की मूर्ति स्थापित होगी। प्रथम तल पर रामदरबार के स्थापना की कल्पना श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने की है। दूसरा तल खाली छोड़ा जाएगा। इस तल का प्रयोग धार्मिक कार्यों, अनुष्ठानों के लिए किया जाएगा। बाकी समय में यह तल बंद रखा जाएगा।
100 डिजिटल स्क्रीन पर होंगे रामलला के दर्शन
राममंदिर बन जाने के बाद शहर में 100 स्थानों पर एलईडी स्क्रीन लगाने की तैयारी है। ट्रस्ट का मानना है कि पर्व व त्योहारों पर रामलला के दर्शन के लिए लाखों की भीड़ उमड़ेगी। ऐसे में एक साथ सभी रामलला का दर्शन नहीं कर पाएंगे।
रामजन्मोत्सव पर सभी भक्त रामजन्मभूमि परिसर नहीं पहुंच पाएंगे। ऐसे में शहर में लगी डिजिटल स्क्रीन पर उन्हें उत्सव का लाइव प्रसारण देखने को मिलेगा। शेष दिनों में इन स्क्रीन पर रामकथा का प्रसारण किया जाएगा।