अयोध्या। अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए नया ट्रस्ट बनने के साथ ही रामजन्मभूमि पर दिव्य-भव्य मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। कुछ ही दिनों में ट्रस्ट की पहली बैठक भी होने वाली है, जिसके बाद राममंदिर निर्माण की तिथि भी घोषित हो सकती है।
इस बीच राममंदिर आंदोलन में अपनी जान गंवाने वाले शहीद कारसेवकों के परिजन शहीद कारसेवकों का समुचित सम्मान चाहते हैं। हालांकि कारसेवकों का परिवार उपेक्षा का दंश झेल रहा है लेकिन, नए ट्रस्ट से उन्हें सम्मान मिलने की चाह एवं उम्मीद है। परिवारीजनों का कहना है कि सरकार भले ही हमारी उपेक्षा कर रही है लेकिन, राममंदिर परिसर में शहीद कारसेवकों की स्मृतियां जरूर होनी चाहिए।
30 अक्तूबर 1990 को अयोध्या चलो आंदोलन में लाखों रामभक्त सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए रामनगरी पहुंचे थे। कर्फ्यू में लाठी-गोली का सामना करके तमाम रामभक्त जख्मी हुए और कई मारे भी गए। इनमें अयोध्या के रहने वाले वासुदेव गुप्ता, राजेंद्र धरकार, रमेश पांडेय सहित पांच लोगों ने बलिदान दिया था। इस घटना के बाद दो नवंबर को भी लाखों कारसेवकों ने अयोध्या में कूच किया था।
इस दिन कारसेवकों पर फायरिंग में कोठारी बंधु सहित कई कारसेवक हताहत हो गए थे। इन कारसेवकों को विहिप और राममंदिर आंदोलन से जुड़े संगठन शहीद का दर्जा देते हैं अगर इन परिवारों का कोई हाल तक पूछने वाला नहीं है। कोई कर्ज में डूबा है तो कोई टोकरी बनाकर व कपड़े की दुकान चलाकर रोजी रोटी चला रहा है। इन परिवारीजनों का कहना है कि देश में मोदी एवं प्रदेश में येागी की सरकार आई तो कुछ उम्मीद बंधी थी कि शायद अब कुछ सहायता मिले लेकिन आज तक कोई झांकने नहीं आया। लेकिन नया ट्रस्ट जो बना है हमें उससे उम्मीद है कि वह कारसेवकों को सम्मान देगा। राममंदिर परिसर में उनकी स्मृति होनी चाहिए। राममंदिर के लिए बलिदान देने वालों का स्वप्न अब साकार होने को है।
राममंदिर परिसर में बने शहीद कारसेवकों का स्तंभ
राममंदिर में जान गंवाने वाले शहीद वासुदेव गुप्ता के परिवार की माली हालत बहुत खराब है। पुत्र संदीप गुप्ता किसी तरह नयाघाट पर कपड़े की दुकान से रोजी रोटी चला रहे हैं। वे कहते हैं कि पिता जी की मौत के बाद से ही परिवार बिखर गया। पिता की मौत के बाद विहिप ने मदद के नाम पर कुछ रुपये दिए थे लेकिन, इन परिवारों की जरूरतों के हिसाब से ये मदद बहुत ही कम साबित हुई। तत्कालीन सरकार ने एक लाख की मदद दी थी लेकिन परिवार ने इसे लेने से इंकार कर दिया। कहा इस बात की खुशी है कि अब अयोध्या में राममंदिर बनने की बाधाएं दूर हो गई हैं, मेरे पिता का स्वप्र साकार होने जा रहा है।
शहीद कारसेवकों के परिवारों को भूल गई सरकार : रवींद्र धरकार
राममंदिर आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले राजेंद्र धरकार के भाई रवींद्र धरकार कहते हैं कि शहीद कारसेवकों के परिवारों को सरकार भूल गई। राजेंद्र का परिवार टोकरी बनाकर गुजारा कर रहा है। रवींद्र कहते हैं कि घर के बड़े बेटे की मौत के सदमें में करीब तीन साल बाद भी परिवार उबर नहीं पाया है। परिवार कर्जा में डूबा हुआ है। भाई की मौत से ही माता-पिता बीमार रहने लगे थे, जिनके इलाज में काफी पैसे खर्च हुए। उनके परिवार में भी तीन लड़के और तीन लड़कियां हैं। कहा कि शासन-प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली। नगर विधायक से भी कई बार गुहार लगाई लेकिन, कुछ नहीं हुआ। हम चाहते हैं शहीदों को नया ट्रस्ट पूरा सम्मान दे।