सूतक लगने के बाद हनुमानगढ़ी में कपाट बंद करवाते पुजारी राजू दास।
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अयोध्या। साल का अंतिम सूर्यग्रहण से पहले सूतक बुधवार रात 8.14 बजे से मान्य होने के कारण रामनगरी के सभी मठ-मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। अब गुरुवार दोपहर बाद ही भक्तों को अपने आराध्य के दर्शन हो सकेंगे। रामलला के दरबार में भी पहली पाली में भक्त दर्शन नहीं कर सकेंगे।
इस बार ग्रहण भारत में दिखाई देगा और सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य अंगूठी की तरह नजर आएंगे। इसे वैज्ञानिकों की भाषा में वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्यग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक लगने की मान्यता है। सूर्यग्रहण गुरुवार सुबह 8 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 58 मिनट तक लगेगा।
वैज्ञानिक कहते हैं कि जब पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आता है तब सूर्यग्रहण होता है। यह घटना केवल अमावस्या को ही घटित होती है। ज्योतिषाचार्य शिवेंद्र ने बताया कि मूल नक्षत्र और धनुराषि पर खंडग्रास सूर्य ग्रहण एशिया, दक्षिण और भारत के अधिकांश भागों में देखा जाएगा।
भारतीय समय के अनुसार 26 दिसंबर को यह ग्रहण प्रात: 8 बजकर 14 मिनट से सुबह 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। बुधवार रात 8 बजकर 14 मिनट से ग्रहण का सूतक लग गया है। जिसके चलते हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नागेश्वरनाथ आदि प्रमुख मठ-मंदिरों के कपाट बंद हो गए।
अधिग्रहित परिसर में विराजमान रामलला के पट भी बंद हो गए हैं। मंडलायुक्त/रिसीवर कार्यालय के मुताबिक रामलला ग्रहण के कारण गुरुवार की सुबह पहली पाली में 7 से 11 बजे तक भक्त दर्शन नहीं कर सकेंगे। दूसरी पाली में दोपहर 1 बजे से पुन: भक्तों को रामलला का दर्शन सुलभ होगा।
हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास ने बताया कि बुधवार रात 8 बजे से हनुमानगढ़ी मंदिर का पट बंद कर दिया जाएगा। ग्रहण का सूतक समाप्त होने के बाद ही भक्तों को दर्शन सुलभ होगा। ज्योतिषाचार्य आचार्य शिवेंद्र ने बताया कि ग्रहण के समय मूर्ति पूजा व स्पर्श वर्जित है। इस समय अपने ईष्ट मंत्र या गुरु मंत्र का जप फलकारक होता है।