अयोध्या। अयोध्या मामले में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से रामनगरी को सुरक्षा प्रबंधों में जकड़ दिया गया है। बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
यहां तक कि स्थानीय लोग भी बिना आईडी के शहर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। बंदिशों का असर इस बार कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेले पर भी नजर आया। इस वर्ष रामलला के दर्शनार्थियों की संख्या में पिछले दो वर्षों की तुलना में तीन गुना की कमी हुई। इस वर्ष मात्र 14908 श्रद्धालुओं ने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई।
कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार रामनगरी में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी कमी रही। एक आंकड़े के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा स्नान में हर वर्ष जहां करीब 10 लाख श्रद्धालु सरयू में डुबकी लगाकर पूजन अर्चन करते थे।
वहीं इस वर्ष सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले के बाद की गई बंदिशों के चलते मात्र 2 से 3 लाख श्रद्धालु ही अयोध्या में सरयू स्नान एवं दर्शन-पूजन कर सके। पिछले दो वषों के मुकाबले रामलला के दर्शनार्थियों की संख्या भी इस वर्ष तीन गुना कम हो गई है।
अयोध्या में पूर्णिमा मेले में वहीं श्रद्धालु दर्शन-पूजन कर सके जो यहां परिक्रमा मेले से ठहरे थे, क्योंकि बाहरी श्रद्धालु बंदिशों के चलते कुछ की संख्या में अयोध्या पहुंच सके।
रामलला के दरबार में मंगलवार को 14908 श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। पहली पहली पाली में जहां 5900 श्रद्धालुओं ने रामलला के दरबार में माथा टेका वहीं दूसरी पाली में 9008 श्रद्धालुओें ने रामलला के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। जबकि 2017 में 1 लाख 8 हजार व 2018 में 49112 श्रद्धालुओं ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन रामलला के दरबार में अपनी श्रद्धा अर्पित की थी।
रामलला के दर्शन की अभिलाषा पूरी हुई
वहीं दूसरी तरफ बंदिशों के बावजूद विभिन्न प्रांतों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने रामलला के दरबार में हाजिरी लगाकर अपना जीवन धन्य किया। कोलकाता निवासी राजनाथानी बोले रामलला का दर्शन करने का उत्साह था, उनका दर्शन जब भी अयोध्या आता हूं, तो करता हूं, लेकिन इस बार उनका आकर्षण कुछ अलग ही नजर आया। जबकि कोलकाता निवासी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल जी बजाज ने कहा कि वे पहली बार रामलला का दर्शन करने अयोध्या पहुंचे हैं, फैसला आने के बाद वे खुद को रामलला का दर्शन करने से नहीं रोक सके। गुजरात के समाजसेवी विनोद जी शर्मा बोले अयोध्या आने के बाद यहां से जाने का मन नहीं करता, कहा कि बंदिशें जरूर है, लेकिन इन हालातों में बंदिशों की भी आवश्यकता है। फिर भी इतने बड़े फैसले के बाद अयोध्या संयमित और शांत नजर आ रही है।