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सेवा और सुविधा में सबसे भव्य होगा राममंदिर

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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर की योजना बुधवार को सामने आ गई। हालांकि सुरक्षा कारणों से प्राधिकरण ने मंदिर के संपूर्ण ले आउट पर तैयार अपनी 15 पेज की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। कुल 71 एकड़ भूभाग में चहारदीवारी निकालकर 67.73 एकड़ के परिसर को विकसित करने में भक्तों की सेवा व सुविधा का खास ख्याल रखा गया है।
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राममंदिर तक पहुंचने के लिए 30 मीटर चौड़ी छह लेन की सड़क बनेगी। जबकि 14 मीटर चौड़ा परिक्रमा कॉरिडोर होगा। इसके अलावा परिसर को हरियाली की दृष्टि से विश्व में पहला भव्य मंदिर बनाने का प्लान है। यहां 5 हजार 888 वर्ग मीटर में पार्किंग भी बनेगी। ट्रस्टी व इंजीनियर कहते हैं कि भव्य पर्यावरण से लेकर ऐसी व्यवस्था विश्व के अन्य मंदिरों में कहीं नहीं मिलेगी।
श्रीरामजन्मभूमि के लिए 492 साल के संघर्ष के बाद नागर शैली में बनने जा रहा राम मंदिर अब तक बने के मंदिरों में सबसे अलौकिक होने के साथ भक्तों की सेहत से लेकर सेवा, सहूलियत आदि के लिए भी बेहद खास होगा।
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अयोध्या विकास प्राधिकरण ने तीन तल के मंदिर की लागत पीडब्ल्यूडी के मानक पर करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये तय करते हुए एक फीसदी लेबर सेस करीब 15 लाख तय किया है। लेकिन इसकी सही लागत का निर्धारण नागर शैली में होना बाकी है।
प्राधिकरण के अधिकारी कहते हैं कि एक शिखर और पांच विशाल मंडपों के गुंबद से सुशोभित तीन तल का यह शिखर से लेकर अधिष्ठान तक 17 हिस्सों की डिजाइन किया गया है। इसकी 15 पेज की निरीक्षण आख्या बनी है, जिसमें हर क्षेत्र का जिक्र है, मगर नागर शैली से लागत निकालने का एक्सपर्ट अलग होते हैं। रिपोर्ट में शिखर या विमान, गर्भगृह, कलश, गोपुरम, रथ, उरूशृंग, मंडप, अर्धमंडप, जगति, स्तंभ, परिक्रमा या प्रदक्षिणा, शुकनात, तोरण, अंतराल, गवाक्ष, अमलक और अधिष्ठान का पूरा विवरण है।
मंदिर में भूतल इसलिए कास्ट नहीं किया गया है क्योंकि भूमितल से 12 फीट ऊंचा पिंक स्टोन के फाउंडेशन पर 9 हजार 972 वर्गमीटर में प्रथम तल प्रस्तावित है। ले आउट में पश्चिम ओर रामलला का गर्भगृह होगा, इसमें प्रभुराम समेत चारों भाई विराजमान होंगे। गर्भ गृह से मंदिर की ऊंचाई 49.24 मीटर है। मुख्य शिखर को छोड़ गूढ़ मंडप, नृत्यमंडप, रंगमंडप, प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप पर कुल पांच गुंबद होंगे। समूचा मंदिर पिंक स्टोन से बनेगा। ले आउट में 1850 वर्गमीटर कवर्ड एरिया का दूसरे तल है, जहां पहुंचने के जीना से लेकर सिंहासन पर प्रभुराम व माता सीता विराजमान होंगी। तीनों आई भरत, लक्ष्मण-शत्रुघ्न समेत हनुमान के साथ गुरुजनों के साथ समूचा राम दरबार बनाने का ब्योरा दर्ज है। तीसरा तल खाली होगा, जो 1056 वर्गमीटर कवर्ड एरिया का है। पूर्व मुखी मंदिर देश में नागर शैली के प्रमुख मंदिरों सबसे भव्य बनाने की योजना है।
हाउसिंग की दर से पास हुआ नक्शा, 65 फीसदी मिली छूट
अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव रविंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि सुरक्षा कारणों से राममंदिर व परिसर का नक्शा व उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। नक्शा स्वीकृति करने में हाउसिंग के दर से शुल्क लगाया गया है, धर्मार्थ ट्रस्ट जो आयकर से छूट की श्रेणी में पंजीकृत हैं, उन्हें विकास शुल्क में 65 फीसदी छूट देने का प्रावधान है, ऐसे में राममंदिर के लिए भी तय विकास शुल्क एक करोड़ 79 लाख 45 हजार 477 रुपये के निर्धारण में 65 फीसदी छूट दी गई है। कुल कवर्ड एरिया पर पीडब्ल्यूडी के मानक पर लागत निकालकर लेबर सेस तय हुआ है, नागर शैली में लागत के एक्सपर्ट अलग होते हैं।
जल्द शुरू होगा राममंदिर का निर्माण
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा बताते हैं कि दो से तीन दिन में राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा। वह बताते हैं कि कार्यदायी संस्था एलएंडटी ने अपने सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को काम सौंप दिया है। कुछ मशीनें आ गयी हैं, कुछ बड़ी मशीनें अभी आनी हैं। संभावना है कि दो से तीन दिन में सभी मशीनें आ जाएंगी। जैसे ही मशीनें आ जाएंगी, राममंदिर का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
मंदिर के नक्शे में ग्रीन ट्री की खास डिजाइन
अयोध्या में बनने वाला भगवान राम का भव्य मंदिर पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से बनने वाला विश्व का पहला मंदिर होगा। मंदिर के नक्शे में ग्रीन ट्री को विशेष रूप से डिजाइन किया है। अयोध्या विकास प्राधिकरण बोर्ड से पास नक़्शे में 27 हजार 158 वर्ग मीटर का बड़ा एरिया ग्रीन ट्री के लिए निर्धारित किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा मिश्रा बताते हैं कि पयार्वरण संतुलन की दृष्टि से इसको विशेष रूप से आर्किट्रेक्टों द्वारा डिजाइन कराया गया। इसी कारण मंदिर परिसर में एक बड़ा एरिया ग्रीन ट्री के लिए निर्धारित है। वह बताते हैं कि भूमि पूजन के दौरान इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पौधरोपण किया गया था। वह बताते हैं कि इसमें नवग्रह वाटिका समेत विभिन्न प्रकार की वाटिकाएं स्थापित की जाएगी। इसमें रामायणकालीन दुर्लभ वृक्षों के साथ पर्यावरण को संतुलित करने वाले वृक्ष लगाए जाएंगे।
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