अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण सदियों तक आधुनिक इंजीनियरिंग का बेमिसाल उदाहरण होगा। इसकी रिपोर्ट तैयार करने में आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञ रिसर्च और एनालिसिस का कोई पहलू छोड़ना नहीं चाहते।
आईआईटी की टीम सरयू का किनारा, बलुई मिट्टी और नम हवाओं का ध्यान रखते हुए ऐसा स्ट्रक्चर प्लान करने में जुटी है कि नदी की धारा भविष्य में यदि मंदिर की ओर मुड़ जाए तो भी राममंदिर यथावत रहे।
ट्रस्ट ने तय किया है कि एक आधुनिक ऑटोमैटिक मिक्सिंग प्लांट लगाकर नींव की हजारों साल तक मजबूती के लिए मसाला (सीमेंट-गिट्टी, मोरंग अनुपात) बनाने से पहले सीमेंट में विशेष रसायन की मिक्सिंग होगी। साथ ही 20 टन का लोडर मंगाया जाएगा, जिससे निर्माण के दौरान वाइब्रेट करके नींव की भूकंपरोधी क्षमता और मजबूती परखी जाएगी।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के राममंदिर निर्माण समिति की हुई बैठक के बाद अब निर्माण कार्य में आधुनिक मशीनीकरण और तकनीकी तैयारी पुख्ता की जा रही है। नींव के 12 टेस्ट पाइलिंग बनने के बाद मजबूती को लेकर भेजे गए आंकड़े का परीक्षण करने में आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञ कोई पहलू छोड़ना नहीं चाहते हैं।
सूत्रों का कहना है कि लैब में एक सौ फीट गहरी मोरंग-सीमेंट-गिट्टी से बनी नींव के पिलरों को भूकंप के भारी झटके देकर परखा जा रहा है। राममंदिर से चंद कदम दूर सरयू का कछार होने और नदी की धारा बदलते रहने के खतरनाक इतिहास को लेकर सबसे ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है।
विशेषज्ञ नदी के खतरनाक वेग को पिलर से टकराकर सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं कि हजारों साल के सफर में यदि कभी नदी की धारा मुड़े तो भी राममंदिर चट्टान की तरह खड़ा रहे। इधर, ट्रस्ट के साथ एलएंडटी और टाटा कंपनी के इंजीनियर्स की टीम मंदिर की नींव में बनने वाले 1200 पिलर को लेकर रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। दूसरी तरफ रामघाट स्थित कार्यशाला से पत्थरों की शिफ्टिंग की भी तैयारी तेज हो गई है।
सारा फोकस राममंदिर की मजबूती पर: चंपत राय
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कार्यशाला का निरीक्षण कर शिफ्टिंग को लेकर खाका खींचा। पत्रकारों से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि हमारा फोकस राममंदिर की मजबूती पर है। एलएंडटी सहित टाटा कंस्ट्रक्शन व ट्रस्ट के इंजीनियरों सहित आईआईटी रूड़की के इंजीनियरों के साथ तय हुआ है कि मंदिर की नींव, पत्थरों की आयु के हिसाब से होनी चाहिए।
भूकंप के झटकों को झेलने की क्षमता वाला मंदिर हो, लोड बियरिंग कैपिसटी होना चाहिए। इसके लिए ऑटोमैटिक प्लांट पर ध्यान ज्यादा होगा। मंदिर की आयु व लोड बियरिंग कैपिसिटी बढ़ाने के लिए सीमेंट में कुछ विशेष रसायन मिलाया जाएगा।
इसके लिए रामजन्मभूमि परिसर में ऑटोमेटिक मिक्सिंग प्लांट की स्थापना की जाएगी। उन्होंने बताया कि कौन सा विशेष रसायन सीमेंट में मिलाना है यह विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम को तय करना है। बताया कि रामजन्मभूमि परिसर की जमीन काफी हद तक बलुई है, जमीन को मजबूती देना है, उसे कंप्रेस करना है। इसके लिए कम से कम 20 टन का रोलर वाहन चाहिए, जिसमें वायब्रेशन की क्षमता हो। इन सारे बिंदुओं पर विचार विमर्श किया गया है अब इसे मूर्त रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है।
गुलाबी पत्थरों की आपूर्ति को बंशीपहाड़पुर से हो रहा संपर्क
राममंदिर के लिए शेष करीब साढ़े तीन लाख घन फुट पत्थरों की आपूर्ति की भी तैयारी की जा रही है। इसके लिए राजस्थान के बंशीपहाड़पुर से संपर्क किया जा रहा है, बातचीत शुरू हो गई है, शीघ्र ही पत्थरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। ट्रस्ट के डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि राममंदिर की पहली मंजिल के लिए रामघाट स्थित कार्यशाला में सवा लाख घनफुट पत्थर तराशे गए हैं। शेष पत्थरों की आपूर्ति को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। बहुत जल्द ही कार्यशाला में तराश कर रखे गए पत्थरों को रामजन्मभूमि परिसर पहुंचाया जाएगा। इससे पूर्व कार्यशाला में पत्थरों की सफाई का कार्य होगा, जैसे-जैसे पत्थर साफ होते जाएंगे उसके बाद उन्हें रामजन्मभूमि परिसर में शिफ्ट किया जाएगा।