अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर परिसर में एक विशेष स्मारक बनाने की योजना को मूर्त रूप देने में जुटा है। इसमें राममंदिर के पांच सौ वर्षों के संघर्ष की पूरी कहानी विविध तरीकों से दर्शाई जाएगी, ताकि रामलला का दर्शन करने आने वाले रामभक्त सदियों के संघर्ष से रूबरू हो सकें।
ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक राममंदिर परिसर कई आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। मंदिर परिसर में रामायण म्यूूजियम के जरिए राम की गाथा का दृश्यांकन भी किया जाएगा तो एक विशेष स्मारक बनाकर अयोध्या आने वाले रामभक्तों को राममंदिर आंदोलन के पांच सौ वर्षों के संघर्ष से रूबरू कराने की भी योजना है। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में बनने वाले इस स्मारक में अयोध्या के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ उन तमाम विशिष्टतम लोगों की प्रतिमा और चित्र लगेंगे जो कि किसी न किसी कालखंड में अयोध्या से विशेष रूप से जुड़े रहे हैं।
इसके अलावा मंदिर आंदोलन की पूरी कहानी और इसमें शामिल लोगों के जीवन वृत्त को भी इस स्मारक में प्रदर्शित किया जाएगा। ट्रस्ट सूत्रों के मुताबिक स्मारक को एक विशाल परिसर के रूप में स्थापित किया जाएगा। इस स्मारक के जरिए दुनिया भर से अयोध्या आने वाले लोग उन लोगों को जान सकेंगे जो 500 वर्ष तक जन्मभूमि के लिए चले संघर्ष के सहभागी रहे हैं। हालांकि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से इसे लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज कहते हैं कि राममंदिर आंदोलन में योगदान देने वाले को पूरी दुनिया जाने इसका प्रयास है। युवा पीढ़ी को भी राममंदिर के लिए हुए संघर्ष की पूरी जानकारी तो होनी ही चाहिए, हमारी ऐसी मंशा है, लेकिन अंतिम निर्णय ट्रस्ट को लेना है।
कार्यशाला में भी राममंदिर आंदोलन की है झांकी
90 के दशक में पत्थर तराशी के लिये स्थापित की गई विहिप कार्यशाला में कारसेवा में शहीद हुए कोठारी बंधु, अशोक सिंहल, महंत अवैद्यनाथ, महंत रामचंद्रदास परमहंस जैसे दिग्गजों का चित्र लगा हुआ है, जिन्होंने राम मंदिर के लिये संघर्ष किया। कार्यशाला आने वाले श्रद्धालु राम मंदिर के लिये तराशे गये पत्थरों का दीदार कर अपने आराध्य श्रीराम को प्रणाम करते हैं, इसके साथ वह राम मंदिर आंदोलन के दौरान संघर्ष करने वालों के इतिहास से भी रूबरू होते है। विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि रामजन्मभूमि न्यास कार्यशाला में बहुत पहले से ही स्वर्गीय अशोक सिंहल व राममंदिर आंदोलन के महानायक रामचंद्र दास परमहंस सहित अन्य के चित्र लगाए गए हैं। कार्यशाला में एक प्रदर्शनी भी लगी हुई है जो राममंदिर आंदोलन की कहानी बयां करती है। राममंदिर परिसर में भी मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले महापुरुषों की स्मृति में स्मारक जरूर बनाया जाएगा।