अयोध्या। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पांच अगस्त को किए गए भूमिपूजन के बाद रामजन्मभूमि परिसर में नीव का निर्माण शुरू होने से पहले 1989 में हुए शिलान्यास स्थल के पास बने चबूतरे को तोड़ा जा रहा है। इस चबूतरे के निर्माण में कारसेवकों ने श्रमदान दिया था।
20 अगस्त को दिल्ली में मंदिर निर्माण समिति की बैठक में यह तय किया गया था कि राममंदिर 40 माह के भीतर बनकर तैयार हो जाए। इसके लिए अब नीव खोदाई की तैयारी तेज हो गई है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा बताते हैं कि 8 नवंबर 1989 में राममंदिर निर्माण के लिए शिलापूजन व 9 नवंबर को राममंदिर का शिलान्यास हुआ था। शिलान्यास के समय केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी।
महंत रामचंद्र दास परमहंस, महंत नृत्यगोपाल दास, अशोक सिंहल, डॉ.रामविलास दास वेदांती, महंत अवैद्यनाथ, महंत धर्मदास, कामेश्वर चौपाल आदि की उपस्थिति में यह शिलान्यास हुआ था। विहिप के मॉडल के अनुसार पहले गर्भगृह फिर रंगमहल उसके बाद राममंदिर का प्रथम गेट सिंहद्घार बनना था। सिंहद्वार से ही मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाना था। इसलिए इसी जगह को राममंदिर निर्माण शुरू करने के लिए चिह्नित किया गया।
सिंहद्वार के पास ही राममंदिर के लिए शिलान्यास हुआ। इसी स्थल पर चबूतरे का निर्माण कार्य शुरू हुआ, लेकिन फिर विरोध के चलते काम रुक गया। बाद में जब प्रदेश में कल्याण सिंह की सरकार आई तो उन्होंने रामजन्मभूमि न्यास को 43 एकड़ भूमि लीज पर दे दी थी, उसके बाद पुन: सिंहद्वार पर प्लेटफार्म बनाने का काम शुरू हुआ। जुलाई 1992 में शिलान्यास स्थल पर चबूतरा बनाया गया। इसमें कारसेवकों ने भी श्रमदान करते हुए कंकरीट डाली थी। इसी के कुछ ही महीने बाद दिसंबर 1992 में विवादित ढांचा ध्वस्त हो गया था।
चबूतरे को तोड़ने में लगी तीन पोकलैंड
शिलान्यास स्थल पर बना चबूतरा काफी मजबूत है, इसे तोड़ने में तीन पोकलेंड मशीन लगाई गईं हैं। रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि चूंकि अब राममंदिर निर्माण शुरू होने जा रहा है और इस चबूतरे का कोई औचित्य नहीं रह गया है इसलिए इसे तोड़ा जा रहा है। शिलान्यास स्थल पर कारसेवकों के श्रमदान से यह चबूतरा बनाया गया था। चबूतरे में कंकरीट, सीमेंट आदि का प्रयोग किया है जिससे यह काफी मजबूत बना है। इसलिए इस चबूतरे को तोड़ने में कारीगरों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वर्तमान में यह चबूतरा मानस भवन के पश्चिम दिशा में स्थित है, तीन पोकलैंड मशीनों के जरिए इसे तोड़कर मलबा हटाने का काम में कारीगर तेजी से जुटे हैं।