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शुभ कार्य से पूर्व इंद्र, जल व सूर्य देवता ने किया रामनगरी का अभिषेक

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अयोध्या। अयोध्या में दिव्य श्रीराम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए पांच शताब्दियों के संघर्ष व संकल्प का परिणाम बुधवार को पूर्ण हुआ। इस एतिहासिक दिन वायु, इंद्र व सूर्य देवता भी धर्मनगरी का अभिषेक करने से अपने को रोक न सके।
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बुधवार की भोर इंद्र देवता ने अपने जल से, वायु् देवता ने अपने वेग से अयोध्या का अभिनंदन किया। तो वहीं भव्य रूप से सजी अपने आराध्य प्रभु राम की नगरी को देखने के लिए बादलों के बीच लुकाछुपी कर रहे सूर्य देवता भी बादलों को मात देते हुए बाहर आए और दिव्य अयोध्या को अपने प्रकाश से आलोकित किया। अयोध्या में मंदिर निर्माण कार्य से पूर्व इस संयोग ने साबित कर दिया अब शुभ ही शुभ होने वाला है।
अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए होने वाले भूमि के दिन बुधवार की शुरुआत ने ही धर्मनगरी अयोध्या को मगन कर दिया। सुबह शुरूआत बारिश व तेज हवाओं से हुई। इसने मठ मंदिरों में पौ फटने से पूर्व दिनचर्या शुरू करने वाले संत महंतों व रोजाना सरयू स्नान को जाने वाले रामभक्तों को सुखद अनुभूति प्रदान की। बुधवार अयोध्या में भूमि पूजन व मंदिर निर्माण कार्यारंभ से पूर्व असीम आनंद में धर्मनगरी डूबी रही।
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हनुमानगढ़ी समेत अन्य मठ मंदिरों में प्रात: कालीन आरती से पूर्व भगवान को नवीन वस्त्र पहनाए गये व फूलों से उनका अभिषेक किया गया। सभी संत व श्रद्धालु भगवान के सम्मुख उनके भव्य मंदिर निर्माण की शुभ व एतिहासिक बेला की कल्पना करते दिखे। अयोध्या के दर्जनों स्थानों से गूंज रही रामधुन के बीच जोर-शोर से हो रहा जयश्रीराम का उद्घोष भक्तों का उत्साह बढ़ा रहा था।
भोर चार बजे से ही अपनी दिनचर्या शुरू करने वाले बड़ी यज्ञवेदी के यामुनाचार्य जी महराज कहते हैं कि आज सुबह से उनके शरीर में अद्भुत शक्ति व भक्ति भावना का संचार था। सुबह आरती के समय भगवान के दिव्य स्वरूप पर कुछ अलग ही प्रकाश व तेज दिख रहा था। दोपहर में भूमि पूजन के दौरान अपने मंदिर में भगवान का स्वरूप मुस्कुराता हुआ दिख रहा था।
इससे स्पष्ट होता है कि आज प्रभु श्रीराम भी अलौकिक आनंद में हैं। हनुमानबाग के महंत जगदीश दास जी महराज कहते हैं कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम इस पल को देखने के लिए अयोध्या में हैं। बताया कि सुबह अपने आराध्य बजरंग बली के मुख मंडल पर जो रसिक भाव था, वह उनकी रामभक्ति को महसूस करा रहा था।
नित्य सरयू स्नान करने वाले बुजुर्ग संत रामस्वरूप दास कहते हैं कि आज मां सरयू का वेग कुछ ज्यादा ही था, लगता था वह भगवान के मंदिर निर्माण की इस बेला में भाव विभोर होकर उनकी नगरी का अभिषेक करना चाहती हो। राघव कुंज के रंजीव शरण दास कहते हैं कि अब तो आनंद ही आनंद है, इस शुभ कार्य के शुभारंभ से अब अयोध्या का स्वरूप बदल जाएगा।
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