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राममंदिर की भव्यता और ऊंचाई बढ़ाने का ट्रस्ट अध्यक्ष ने दिया समर्थन

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महंत नृत्यगोपाल दास से मिलते हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर की भव्यता और ऊंचाई बढ़ाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसको लेकर रामनगरी में हिंदू संगठनों द्वारा हस्ताक्षर अभियान भी शुरू कर दिया गया है।
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गुरुवार को दावा किया गया कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने भी अभियान को अपना समर्थन देते हुए हस्ताक्षर किए हैं। जबकि हाल ही में राममंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने राममंदिर की भव्यता एवं ऊंचाई को लेकर संतों में किसी भी प्रकार के मतभेद से इनकार किया था।
हिंदूवादी संगठनों द्वारा विश्व के विशालतम राममंदिर की मांग को लेकर चलाए जा रहे अभियान को उस समय बल मिला, जब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष तथा मणिराम दास छावनी के श्री महंत नृत्य गोपाल दास ने गुरुवार को हिंदूवादी संगठनों के एक प्रतिनिधि मंडल द्वारा सौंपे गए प्रपत्र पर हस्ताक्षर कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
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प्रतिनिधि मंडल में बाबरी विध्वंस के आरोपी व धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे, 1992 के कारसेवक रहे हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय, क्षत्रिय महासभा के संरक्षक अधिवक्ता कमलेश सिंह, धर्म सेना प्रदेश अध्यक्ष रवि शंकर पांडेय, समाजसेवी राजेश सिंह मानव आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। संतोष दुबे ने कहा कि हमारी मांग जायज है। लड़ाई सत्य के लिए है इसीलिए सभी संतों-महंतों को इसका समर्थन करना चाहिए।
अधिवक्ता कमलेश सिंह ने इस अभियान में संतों की भागीदारी पर बल दिया। वहीं हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता मनीष पांडेय ने दावा किया कि हमारे अभियान को राममंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष ने भी प्रपत्र पर हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दिया है। जिससे यह साबित होता है कि अयोध्या का संत समाज भी अयोध्या में विशालतम मंदिर का निर्माण चाहता है।
श्री महंत के हस्ताक्षर किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सत्य की इस लड़ाई में, वीर बलिदानी कारसेवकों को न्याय दिलाने की दिशा में और राम की मर्यादा के अनुसार मंदिर के निर्माण में संतों का सहयोग परम आवश्यक है, जो मिल भी रहा है।
विहिप के प्रस्तावित मॉडल पर संतों ने खड़ा किया था सवाल
विहिप के प्रस्तावित मॉडल पर इससे पहले भी संतों ने सवाल खड़ा किया था। संतों का कहना था कि अयोध्या में पांच सौ वर्षों के संघर्ष के बाद राममंदिर का निर्माण होने जा रहा है इसलिए यहां विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर बनना चाहिए।
संतों ने विहिप के प्रस्तावित मॉडल को यह कहते हुए नकार दिया था कि इस मॉडल के अनुसार जो मंदिर बन रहा है वह अयोध्या की गरिमा के अनुकूल नहीं है। इसको लेकर दिगंबर अखाड़ा में संतों की एक बैठक भी हुई थी, जिसमें पूर्व सांसद डॉ.रामविलास दास वेदांती, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास सहित कई संत-धर्माचार्य ने विशालतम मंदिर की मांग की थी। जिसके बाद ट्रस्ट के महासचिव ने अयोध्या के कई मंदिरों में बैठक कर संतों से संवाद भी किया था। विगत दिनों उन्होंने यह स्पष्ट भी किया था कि राममंदिर की भव्यता व विशालता को लेकर संतों में कोई मतभेद नहीं है।
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