अयोध्या। राममंदिर निर्माण में कारसेवा के लिए विहिप को संतों के आदेश का इंतजार है। शुक्रवार को कारसेवकपुरम में कानपुर, अवध, काशी व गोरक्ष सहित चार प्रांत के पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में हुई बैठक में राममंदिर निर्माण में विहिप की भूमिका को लेकर मंथन किया गया।
कोरोना के कारण प्रभावित हुए राममंदिर निर्माण का मुद्दा छाया रहा। शीर्ष पदाधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि शीघ्र ही शुभ मुहूर्त में राम मंदिर का भूमि पूजन होगा। मंदिर का मॉडल और पूजित शिलाओं से समझौता नहीं होगा। हिंदू जनमानस को तन-मन-धन के साथ विजयोत्सव स्वरूप में राम मंदिर निर्माण की कार सेवा के लिए तैयार रहना होगा। एक शीर्ष पदाधिकारी ने राम मंदिर मॉडल पर कुछ संतों के उठाए गए सवाल पर तल्ख टिप्पणी भी की।
कारसेवकपुरम में बंद कमरे में शुक्रवार को दो सत्रों में चली बैठक के दौरान पहले से तय 27 पदाधिकारियों के अलावा किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई। विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा भी इस बैठक से बाहर रहे।
उनका कहना था कि उन्हें भी प्रवेश की इजाजत नहीं थी। अंदर बैठक में किन-किन बिंदुओं पर चर्चा हुई, इसे मीडिया में सार्वजनिक करने की मनाही थी। संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ है। बाहर आकर पदाधिकारी भी राम मंदिर मुद्दे पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए। यहां तक कि स्वयं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव व विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुए।
काफी मशक्कत के बाद बैठक में शामिल विहिप के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अंबरीश सिंह ने कहा कि मंदिर आंदोलन में हमारी भूमिका रही है। विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर के लिए हमेशा संत-धर्माचार्य के आदेशों पर भूमिका निभाता रहा है।
अब मंदिर निर्माण में कोई बाधा नहीं रह गई है। विश्व हिंदू परिषद ने पहले भी तय किया था कि मंदिर निर्माण शुरू होने के साथ अलग-अलग प्रांतों के लोग कार सेवाएं करेंगे। ऐसे में जैसे ही संतों का आदेश मिलेगा। हिंदू समाज राम मंदिर निर्माण में तन, मन, धन से पूरी भूमिका निभाने के लिए तत्पर रहेगा।
संत जो निर्णय लेंगे, उसी के अनुसार कार्य होगा। कहा कि मंदिर निर्माण के लिए यदि जनता का कार्यक्रम संत तय करेंगे तो उसमें हम भाग लेंगे। राममंदिर निर्माण में विहिप की क्या भूमिका होगी, संतों से विचार विमर्श के बाद तय किया जाएगा। सकहा कि यह बैठक विश्व हिंदू परिषद की रूटीन बैठकों का हिस्सा है। कानपुर, अवध, काशी, गोरक्ष के चार-चार, पांच-पांच पदाधिकारियों सहित विहिप व बजरंग दल के पदाधिकारियों को बुलाया गया है। आज की परिस्थिति में संगठनात्मक गतिविधियां कैसे चलाईं जाएं, इस पर चर्चा हुई।
बैठक में वीएचपी के केंद्रीय महामंत्री विनायक राव, संरक्षक दिनेशचंद्र, केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी, केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज सहित चारों प्रांतों के पदाधिकारी व बजरंगदल के पदाधिकारी मौजूद रहे।
प्रस्तावित मॉडल पर ही बनना चाहिए मंदिर
विहिप के प्रस्तावित मॉडल पर रामनगरी के कुछ संतों द्वारा सवाल खड़ा किए जाने पर अंबरीश सिंह ने कहा कि प्रस्तावित मॉडल के आधार पर मंदिर बनना है या नहीं, यह ट्रस्ट को तय करना है। विश्व हिंदू परिषद का स्पष्ट मत है कि जिस मॉडल का पूजन पूरे देश में हुआ है, जिसको 1989 के कुंभ में पूज्य देवरहाबाबा की उपस्थिति में स्वीकार किया गया है, उसी मॉडल का मंदिर बनना चाहिए। बाकी निर्णय संत व ट्रस्ट को करना है। बताते चलें कि प्रस्तावित मॉडल को लेकर रामनगरी के कुछ संतों ने विरोध करते हुए कहा था कि यह मंदिर राममंदिर की गरिमा के अनुकूल नहीं है। अयोध्या में विश्व का सबसे ऊंचा राममंदिर बनना चाहिए।