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महंत नृत्यगोपाल दास ने किए रामलला के दर्शन, बोले, अब मंदिर निर्माण शुरू

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रामलला का दर्शन कर बाहर आते महंत नृत्यगोपाल दास। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने सोमवार को 28 साल बाद रामलला के दर्शन किए। सजल नेत्रों से कुछ देर तक वह आराध्य को अपलक निहारते रहे। फिर बोले- यह कैसी लीला रची है प्रभु...। उनका इशारा था कि इतने संघर्ष के बाद फैसला आया तो भव्य मंदिर निर्माण में अब महामारी बाधक न बनने पाए। दर्शन के बाद बाहर आए तो ऐलान किया कि उन्होंने राममंदिर का निर्माण कार्य सोमवार से शुरू करा दिया है। अब मशीनें आती रहेंगी और मंदिर बनता रहेगा।
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1992 में विवादित ढांचा विध्वंस के बाद पहली बार सोमवार को रामलला के दरबार में माथा टेकने पहुंचे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष और मणिराम दास की छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास राम मंदिर आंदोलन के अहम पदों पर आसीन रह चुके हैं। महंत ने सोमवार सुबह राम जन्मभूमि परिसर के अंदर संपर्क मार्ग से प्रवेश लिया। इस दौरान परिसर में मंदिर निर्माण को लेकर चल रहे समतलीकरण कार्य में मिले अवशेषों को भी देखा।
रामलला के दर्शन कर भाव विभोर हुए ट्रस्ट के अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि आज बहुत ही पवित्र दिन है। जहां रामलला विराजमान हैं, उनका दर्शन करने के लिए हम लोग आए। बहुत ही अच्छे से दर्शन हुए और सभी लोगों से वार्ता हुई। जहां रामलला प्रकट हुए हैं, वहां पर आना-जाना चाहिए, दर्शन करना चाहिए। मंदिर निर्माण कार्य पर बोले कि मंदिर निर्माण की जो शिला है वह तैयार हो चुकी है। मंदिर निर्माण कार्य आज से शुरू हो गया है, मशीनें आती रहेंगी मंदिर बनता रहेगा। हमने आज से मंदिर निर्माण का कार्य शुरू करा दिया है।
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छह दिसंबर को ढांचा ढहाने में उपस्थित थे नृत्यगोपाल : शरद
विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि 6 दिसंबर 1992 में हुई कारसेवा के दौरान महंत नृत्य गोपाल दास उपस्थित रहे। उसके बाद से अभी तक परिसर में अपना कदम भी नहीं रखा। उनका मानना था कि संगीन के साए में आराध्य का दर्शन नहीं करेंगे। इसके बाद लगातार सुरक्षा मानकों को देखते हुए तमाम बाधाएं भी आती रहीं। अस्थाई मंदिर में रामलला को विराजमान कराने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी बीमार होने की वजह से शामिल नहीं हो पाए थे। सोमवार को समतलीकरण कार्य के दौरान मिले अवशेषों को देखने की इच्छा प्रकट की थी, जिसको लेकर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य अनिल मिश्र, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय पदाधिकारी राजेंद्र सिंह पंकज, शरद शर्मा, महंत शशिकांत दास व अन्य संत भी मौजूद रहे।
अवशेष सिद्ध करते हैं दिव्य मंदिर था
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने बताया कि परिसर में जो भी पत्थर व अवशेष मिले हैं, यह सिद्ध करते हैं कि यहां बाबरी मस्जिद नहीं रामलला का दिव्य मंदिर था। कई प्रकार के आवश्यक भगवान की कृपा से आज प्राप्त हुए हैं। इससे सिद्ध होता है कि यही स्थान पर रामलला का मंदिर था है और आगे भी रहेगा। राम जी के राज में तैयारी कर ली गई है अब समय आ गया है भव्य मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है।
लॉकडाउन में रामलला को मिला 4.60 करोड़ दान
लॉकडाउन रामलला को भव्य मंदिर निर्माण के लिए अब तक 4.60 करोड़ रुपये दान मिल चुके है। यह धनराशि राम मंदिर निर्माण के गठित राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दो अलग-अलग खातों में जमा हुई है। अप्रैल से भारतीय स्टेट बैंक में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का दान के खाते में राम भक्तों से दान देने की अपील की गई थी। ट्रस्ट के महामंत्री के मुताबिक रामनवमी के दिन खातों को ओपन किया गया था। उन्होंने बताया कि रामभक्त सेविंग खाता संख्या 39161495808 और करंट खाता संख्या 39161498809 में अपने मन मुताबिक दान कर सकते हैं।
भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही करेंगे
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने भले ही राममंदिर निर्माण शुरू करने का एलान कर दिया हो, लेकिन भव्य मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही करेंगे। ट्रस्ट के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक महंत ने भावावेश में राममंदिर निर्माण शुरू होने की घोषणा की है, हकीकत में अभी एक ईंट भी नहीं रखा गया है।
निर्माण से पहले मौके से लोहे की बैरिकेडिंग हटाने के साथ भूमि का समतलीकरण जरूरी था, 67.77 एकड़ भूमि को समतल कर प्रधानमंत्री के आने लायक बनाने में अभी एक पखवाड़ा लग सकता है। पहले भी 30 अप्रैल को लगभग तय हो चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या दौरे से पहले समतलीकरण का कार्य पूरा करना था, मगर कोरोना महामारी से तैयारी ठप हो गई थी। अब जल्द ही प्रधानमंत्री के द्वारा शुभ मुहूर्त में भूमि पूजन के तिथि की घोषणा होगी।
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