अयोध्या। रामलला को नए गर्भगृह में स्थापित किए जाने के बाद पुराने गर्भगृह की सफाई का काम भी तेजी से चल रहा है। गर्भगृह स्थल में लगे टेंट को 28 साल बाद हटाकर साफ-सफाई की जा रही है। पुराना गर्भगृह स्थल पूरी तरह से साफ कराया जा चुका है, जबकि आसपास के क्षेत्र में सफाई की जा रही है। ट्रस्ट के सदस्यों को अब लॉक डाउन खत्म होने का इंतजार है, लॉक डाउन खत्म होने के बाद जैसे ही स्थिति सामान्य होती है। पुराने गर्भगृह स्थल का समतलीकरण कार्य शुरू कर मंदिर निर्माण का कार्य भी प्रारंभ कर दिया जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ भगवान रामलला के अस्थायी गर्भगृह में हनुमान जी की नई मूर्ति स्थापित गई है और पुरानी खंडित मूर्ति को सरयू में विसर्जित कर दिया गया है। रामलला के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि ढांचा विध्वंस के बाद 1 मार्च 1992 को उन्हें रामलला की पूजा-अर्चना करने का सौभाग्य मिला। इसी दौरान उन्होंने देखा कि गर्भगृह में प्राचीन हनुमान जी की दो मूर्तियां है। एक संगमरमर से बनी 2 फिट की और दूसरी पत्थर से बनी 1 फिट की। छोटी मूर्ति खंडित है। इसकी जानकारी तुरंत रिसीवर को दी गई, लेकिन उन्होंने उसे हटाने की अनुमति नहीं दी।
न्यायालय के आदेश से गर्भगृह में रखी सभी मूर्तियों का निरीक्षण कर उनकी गणना अधिकारी रोजाना करते थे। अब रामलला के अस्थायी मंदिर में विराजमान होने के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों को इस बात से अवगत कराया गया तो जगतगुरु स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर और दो वैदिक आचार्यों की मौजूदगी में पत्थर से बने लगभग 4 इंच के हनुमान जी को वैदिक रीति-रिवाज से श्रीरामलला के बगल में स्थापित किया गया। ट्रस्ट के सदस्य डॉ.अनिल मिश्र के मुताबिक अब गर्भगृह का स्थल पूरी तरह साफ हो चुका है। कोरोना वायरस से देश के हालात सामान्य होने के बाद मंदिर का निर्माण भी शुरू हो जाएगा।