इकबाल अंसारी को गुझिया भेंट करते महंत परमहंस दास।
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अयोध्या। रामनगरी में सांप्रदायिक सद्भाव की जड़ें अत्यंत गहरी है, इसकी ताकीद समय-समय पर होती रहती है। रामनगरी में मंदिर निर्माण की तैयारियों के बीच सांझी विरासत भी बुलंद हो रही है। होली के पहले यदि मस्जिद के पक्षकार रहे मो. इकबाल अंसारी ने तपस्वी जी की छावनी सहित अनेक मंदिरों में पहुंच संतों के साथ होली खेली तो शुक्रवार को तपस्वी छावनी के महंत परमहंसदास इकबाल के कोटिया स्थित आवास पर होली की मिठाई लेकर पहुंचे।
महंत परमहंसदास ने कहा, यह सामान्य मिष्ठान नहीं है बल्कि इसमें भाईचारा और आत्मिक एकता की मिठास घुली है। इसी मौके पर परमहंसदास ने इकबाल को रामलला के दर्शन की दावत दी जिसे इकबाल ने सहर्ष स्वीकार किया। तय हुआ कि 25 मार्च को रामलला वैकल्पिक गर्भगृह में विराजमान होंगे और इसके बाद 27 मार्च को सुबह 10 बजे रामलला का दर्शन करना उचित होगा।
इकबाल ने परमहंसदास का स्वागत करते हुए कहा अब्बू (मरहूम हाशिम अंसारी) के समय से ही हमें अयोध्या के सद्भाव और भाईचारा का बराबर अनुभव होता रहा। मंदिर आंदोलन के पर्याय रामचंद्रदास परमहंस तथा अब्बू एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमा लड़ते रहते लेकिन, दोनों के बीच का सामंजस्य आज भी याद किया जाता है।
रामलला के दर्शन का प्रस्ताव स्वीकार करने के सवाल पर इकबाल ने कहा, हमारे मन में हमेशा रामलला के प्रति श्रद्धा रही। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि रामजन्मभूमि पर रामलला ही विराजमान होंगे। ऐसे में जब रामलला नए गर्भगृह में शिफ्ट हो जाएंगे तो रामलला का दर्शन करने में अति खुशी होगी।