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राममंदिर निर्माण से पहले भव्य होगी रामकोट की परिक्रमा

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रामकोट की परिक्रमा के दौरान मौजूद साधु संत व अन्य। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। हर वर्ष चैत्र नवरात्र की पूर्व संध्या पर होने वाली रामकोट की परिक्रमा को लेकर इस बार खासा उत्साह है। राममंदिर निर्माण से पहले रामकोट की परिक्रमा पूरे भव्यता के साथ निकाली जाएगी, इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं।
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महाराज दशरथ व रानियों के महल, रामलला का जन्मस्थान समेत दर्जनों पौराणिक मंदिरों को समेटे रामकोट की परिक्रमा विशेष फलदायी होती है। नवरात्र से एक दिन पहले 24 मार्च को परिक्रमा को लेकर तैयारी तेज हो गई है। राममंदिर पर आए फैसले से राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के बाद से ही परिक्रमा को लेकर संत समाज उत्साहित है। परिक्रमा में अयोध्या के हजारों साधु-संत एवं भक्त शामिल होंगे।
विक्रमादित्य महोत्सव समिति की ओर से हर वर्ष होने वाली रामकोट की परिक्रमा इस बार दिव्यता व भव्यता का पर्याय होगी। परिक्रमा के संयोजक पूर्व सांसद विनय कटियार बताते हैं कि हर वर्ष होने वाली रामकोट की परिक्रमा का ही प्रताप है कि आज रामलला की रिहाई हो चुकी है।
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हर वर्ष भव्य राममंदिर निर्माण की चाहत से परिक्रमा की जाती रही है। इस वर्ष राममंदिर की चाहत पूर्ण होने की खुशी में परिक्रमा का आयोजन भव्यतम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 24 मार्च को दोपहर तीन बजे भगवदाचार्य स्मारक सदन से हाथी, घोड़ा, बैंड-बाजा व भगवान के स्वरूपों के साथ रामकोट की भव्य परिक्रमा का शुभारंभ होगा। इस दौरान पूरी नगरी को राममय बनाने की तैयारी है।
झंडा, तोरण व पताकाओं से रामकोट के पूरे क्षेत्र व मुख्य मार्ग उदया चौराहे से नयाघाट तक को सजाया जाएगा। घर-घर जय श्रीराम व ओम की पताका लहराएगी। विनय कटियार बताते हैं कि परिक्रमा क्षेत्र में स्थित हर घर के दरवाजे पर भव्य रंगोली सजाई जाएगी। पूरी रामनगरी राम की भक्ति में रंगी नजर आएगी। यह वर्षों के त्याग एवं बलिदान का ही परिणाम है कि आज रामलला कैद से आजाद होकर दिव्य-भव्य मंदिर में विराजने वाले हैं।
तैयारी को लेकर बैठक व जनसंपर्क तेज
परिक्रमा को लेकर अभी से तैयारी शुरू हो गई है। विक्रमादित्य महोत्सव समिति से जुड़े व परिक्रमा के संयोजक मंडल में शामिल रविदास बताते हैं कि इस बार राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के कारण खासा उत्साह है, इसलिए परिक्रमा को उत्सव के रूप में मनाने की तैयारी है। घर-घर जनसंपर्क किया जा रहा है, ताकि बड़ी संख्या में लोग परिक्रमा का हिस्सा बन सकें। बैठकों का दौर भी चल रहा है, साधु-संतों के साथ बैठक कर परिक्रमा को भव्य बनाने की रणनीति बनाई जा रही है।
रामकोट की परिक्रमा से क्षय होते हैं पाप
रामनगरी का रामकोट मोहल्ला पौराणिक एवं ऐतिहासिक मान्यताओं को समेटे है। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.रामानंद शुक्ल बताते हैं कि अयोध्या की जो विशेषता है वह रामजन्मभूमि के कारण है। रामजन्मभूमि की रक्षा के लिए चारों तरफ से कोट (दुर्ग) बनाए गए थे। चारों तरफ कोट के रूप में मंदिरों की स्थापना की गई थी। यह स्थापना रामजन्मभूमि की रक्षा की दृष्टि से थी। एक तरफ कोटेश्वर महादेव, मतगजेंद्र, क्षीरेश्वरनाथ सहित धनयक्ष कुंड स्थापित किए गए जो आज भी अपनी पौराणिक मान्यताओं के कारण श्रद्धा के केंद्र हैं। इसी कारण रामजन्मभूमि के चारों तरफ के क्षेत्र को रामकोट कहा गया। रामकोट साधकों की भूमि रही है। बड़े-बड़े साधकों ने यहां तप, तपस्या और साधना की। इसी रज पर भगवान राम का बचपन बीता है। ऐसी मान्यता हे कि यहां अदृश्य रूप में शक्तियां विराजती हैं। इसी मान्यता के चलते इस कोट की परिक्रमा की जाती है। परिक्रमा करने से समस्त पापों का क्षय होता है।
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