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जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसान लामबंद

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ज्ञापन सौंपते ग्रामीण व अन्य राजनीतिक दल के लोग। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। मांझा बरहटा में जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई के विरोध में बुधवार को ग्रामीण लामबंद हो गए। यहां भगवान श्रीराम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा लगाने के जमीन अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। बुधवार को स्थानीय लोगों ने रेजीडेंट मजिस्ट्रेट को ज्ञापन भी सौंपा।
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मामले को लेकर कोर्ट जाने वाले अरविंद कुमार यादव ने कहा कि बिना हम लोगों की सहमति के जमीनों का अधिग्रहण हो रहा है। इसलिए हमें उच्च न्यायालय का सहारा लेना पड़ा। अरविंद ने बताया कि पिछली तीन पीढ़ी से हम यहां पर निवास कर रहे हैं और 50 साल से यहां पर जमीन पर बंदोबस्त नहीं किया गया और न ही आबादी दर्ज की गई है।
हमने प्रशासन से मांग की है कि इन जमीनों पर आबादी दर्ज की जाए। हमें अपने भूमि का स्वामित्व दिया जाए, उचित मुआवजा मिले। अरविंद ने कहा कि राम हमारे आराध्य हैं हम श्रीराम की मूर्ति का विरोध नहीं कर रहे हैं। प्रशासन की नीतियों का विरोध कर रहे हैं।
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वहीं स्थानीय रामचरण ने भी अपना दुख व्यक्त किया और उन्होंने कहा कि हमारी यहां पर चौथी पीढ़ी है। प्रशासन यहां पर मूर्ति लगाने की कवायद कर रही है हम प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि हमारा जमीन हमारे नाम कर दी जाए और अधिग्रहण न किया जाए। बुजुर्ग रामचरण ने मांग की है कि अधिग्रहण की कार्रवाई में पारदर्शिता बरती जाए।
ग्रामीणों के पक्ष में उतरे नेता
ग्रामीणों के पक्ष में पहुंचे समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्य मंत्री तेज नारायण पांडे पवन व भाकपा नेता सूर्यकांत पांडेय ने सरकार से मांग की है कि ग्रामीणों का उत्पीड़न किसी सूरत में न हो, यहां पर चार पुश्तों से रह रहे स्थानीय की जमीनों और मकान उनके नाम किए जाए। साथ ही उचित मुआवजा देकर ही उनको संतुष्ट करके ही जमीनों का अधिग्रहण हो। आरएम अयोध्या केडी शर्मा ने बताया कि स्थानीय लोगों का कहना है कि महर्षि योगी की यह जमीन है। लेकिन यह लोग सैकड़ों वर्षों से यहां पर बसे हुए हैं सर्वे और चकबंदी की प्रक्रिया ना हो पाने के कारण आबादी नहीं दर्ज हो पाई। स्थानीय लोगों ने ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में मांग रखी है कि चकबंदी कराकर इन लोगों का नाम दर्ज किया जाए। उसके बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाए, जिससे किसानों का नुकसान न हो। जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन दिया गया है।
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