अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने शुक्रवार को राममंदिर निर्माण की प्रगति दिखाई। ट्रस्ट ने बताया कि गर्भगृह में रामलला की अचल मूर्ति स्थापित होनी है। इसके लिए सीबीआरआई रुड़की द्वारा किया गया पहला ट्रायल सफल हो चुका है। इंजीनियरों के अनुसार यदि मूर्ति की ऊंचाई 8.7 फीट ऊंची होगी तो हर रामनवमी को दोपहर 12 बजे सूर्य की किरणें रामलला के मस्तक को अभिषेक करेंगी।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि परकोटा सहित आठ एकड़ में पूरा मंदिर बनेगा। दिसंबर 2023 तक राममंदिर का भूतल तैयार करने का लक्ष्य है। 21 दिसंबर से मकर संक्रांति 2024 के बीच जो शुुभ मुहूर्त विद्वानों द्वारा सुझाया जाएगा उसी पर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।
बताया कि भूतल में 166 लाख घनफीट पत्थर लगने हैं। जिसमें से अब तक 56 हजार घनफीट पत्थर लगाए जा चुके हैं। गर्भगृह के चारों ओर दीवारें बन गई हैं। मंदिर की भाषा में इन्हें मंडोवर कहा जाता है। मंदिर की दीवारें 13 लेयर में बननी हैं, अब तक 8 लेयर डाली जा चुकी हैं। पांच लेयर और डालने के बाद छत पड़ने लगेगी। 2.50 फीट मोटा बीम खंभों के ऊपर रखा जाएगा। छत एक फीट मोटी है। ग्राउंड फ्लोर के सभी 170 स्तंभ लग गए हैं।
चंपत राय ने बताया कि राममंदिर में तीन परिक्रमा पथ होंगे। इससे भीड़ नियंत्रण में आसानी होगी। पहली परिक्रमा गर्भगृह की होगी, दूसरी मंदिर की परिक्रमा तीसरी परिक्रमा परकोटे के अंदर मंदिर परिसर की होगी। बताया कि रिटेनिंग वॉल व मंदिर के बीच परकोटा बन रहा है। परकोटे की लंबाई 750 मीटर होगी। दक्षिण-पूरब में परकोटा के लिए खोदाई शुरू हो गई है। जमीन को मजबूत किया जा रहा है। कंकरीट की चट्टान बिछाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि गर्भग्रह में मकराना के संगमरमर लगे हैं। यह उच्च गुणवत्ता का संगमरमर है। दीवार, खंभें व फर्श सभी संगमरमर के होंगे। गर्भगृह के अतिरिक्त पांच मंडप होंगे। तीन मंडप प्रवेश द्वार से गर्भगृह की ओर होंगे। इने गूढ़, नृत्य व रंग मंडप कहा जाएगा। इसके बाद उत्तर व दक्षिण दिशा में दो कीर्तन मंडप होंगे। इस दौरान मंदिर निर्माण के प्रभारी गोपाल जी, विहिप के शरद शर्मा, पार्षद रमेश दास भी मौजूद रहे।
मंदिर में बनेंगी करीब सात हजार मूर्तियां
चंपत राय ने बताया कि मंदिर के खंभों, दीवारों व गर्भगृह में करीब सात हजार मूर्तियां बनेंगी। हर खंभे पर 16 मूर्तियां बनेंगी। जहां मूर्तियां बननी हैं उस स्थान को खाली छोड़ दिया गया है। शास्त्र के अनुसार किस दिशा में कौन सी मूर्ति बनेगी यह डिजाइन हो चुकी है। कहीं हनुमान तो कहीं गणेश की अलग-अलग मुद्राएं बनेंगी।
श्रीराम के जीवन प्रसंगों से सजेंगी परकोटा की दीवारें
चंपत राय ने बताया कि मंदिर के चारों ओर परकोटा में श्रीराम के जीवन के 100 प्रसंग उकेरे जाएंगे। जिस पत्थर पर यह प्रसंग उकेरेे जाएंगे। वह 6 फीट लंबा, 5 फीट ऊंचा, 2.5 फीट मोटा होगा। इस संबंध में भी काम प्रारंभ हो गया है। राममंदिर के ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन मिश्र के पुत्र वरिष्ठ साहित्यकार यतींद्र मिश्र भी उस टीम में शामिल हैं जो इसकी स्क्रिप्ट बना रही है।
मंदिर के चारों कोनों पर बनेंगे मंदिर
ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र के अनुसार मंदिर के चारों कोनों पर भी मंदिर बनेंगे। एक कोने पर भगवान सूर्य, दूसरे पर भगवती, तीसरे कोने पर भगवान गणपति व चौथे कोने पर भगवान शंकर का मंदिर बनाया जाएगा। दक्षिण में हनुमान जी व उत्तर में अन्नपूर्णा माता का मंदिर बनेगा। इसको लेकर संतों का विचार बन चुका है।
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम शुरू
मंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर परिसर में तीर्थयात्री सुविधा केंद्र का निर्माण कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। मंदिर के पश्चिम दिशा में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगेगा। दो प्लांट लगने हैं। एक का काम शुरू हो चुका है। बताया कि बिजली का सब स्टेशन भी बनाने का काम शुरू हो चुका है।
मंदिर की संरचना
लंबाई- 360 फीट
चौड़ाई- 250 फीट
ऊंचाई-161 फीट
भूतल की ऊंचाई-26 फीट
प्रथम तल की ऊंचाई-24 फीट
दूसरे तल की ऊंचाई- 22 फीट