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मंगल आज जनकपुर हे सखि घर-घर मंगल..

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जानकी महल में फुलवारी लीला में भगवान के स्वरूप। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामनगरी अयोध्या राम विवाहोत्सव के रंग में सराबोर हो चुकी है। आस्था के चरम के साथ इस बार राम विवाह उत्सव में राममंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी भी बयां हो रही है। जैसे-जैसे मुख्य पर्व नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे विवाह उत्सव का रंग गाढ़ा होता जा रहा है।
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मंदिरों में गुरुवार को श्रीराम समेत चारों भाइयों की हल्दी की रस्म हुई तो वहीं रामकथा प्रवचन व रामलीला मंचन जैसे आयोजन इस उत्सव को और भी आकर्षण दे रहे हैं। जानकी महल ट्रस्ट में गुरुवार दोपहर हुई फुलवारी लीला विभिन्न प्रांतों से आए भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी। मंदिरों में मंगल आज जनकपुर हे सखि घर-घर मंगल। मंगल तनेऊ बितान हे सखि घर-घर मंगल... जैसे मांगलिक गीत भावविभोर कर रहे थे।
राममंदिर निर्माण शुरू होने के कारण रामनगरी के संत-धर्माचार्य अत्यंत उत्साहित हैं। विवाहोत्सव का मुख्य पर्व अगहन शुक्ल पंचमी 19 दिसंबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर अयोध्या के मंदिरों से भव्य बारात निकाली जाएगी। मंदिरों में गुरुवार को भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों की हल्दी की रस्म हुई। श्रीराम विवाहोत्सव के लिए दुल्हन की तरह सजे जानकी महल में फुलवारी की लीला ने मन मोह लिया।
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विवाह परंपरा से जुड़े विभिन्न पूजन व अनुष्ठान संपन्न हुए। भक्तों व संतों ने विवाह गीत गाए तो श्रद्धालु भी मगन होकर नृत्य करने लगे। जानकी महल ट्रस्ट के आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि कार्यक्रम में राजा दशरथ के रूप में मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने शिरकत की। वहीं, दशरथ महल बड़ास्थान में राम विवाह का उल्लास शिखर पर पहुंच गया है।
बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में रामकथा व रामलीला मंचन उत्सव का आकर्षण बना हुआ है। आचार्य पीठ लक्ष्मण किला में भी रामविवाह की धूम है। विवाह गीतों से मंदिर गूंज रहा है तो वहीं रामलील मंचन भी उत्सव की शोभा बढ़ा रहा है। इसी तरह विअहुति भवन, कनक भवन, श्रीरामबल्लभाकुंज, हनुमानबाग, लक्ष्मण किला, रसमोद कुंज, रंगमहल, रामहर्षण कुंज सहित रामनगरी के अन्य मंदिरों में राम विवाह पर आधारित विभिन्न अनुष्ठान उत्सव को चार चांद लगा रहे हैं।
रंगमहल में उत्सव की निराली छटा
रामजन्मभूमि परिसर से सटे प्राचीन रंगमहल मंदिर में राम विवाहोत्सव की छटा निराली है। संपूर्ण मंदिर परिसर को फूल-मालाओं, रंग-बिरंगी लाइटों से इस तरह सजाया गया है मानो त्रेतायुग जीवंत हो उठा हो। मंदिर के महंत रामशरण दास बताते हैं कि मंदिर में दो वर्ष पुराने भव्य काष्ठ मंडप में विवाह की रस्म अदा की जाती है। यहां मंदिर में विराजमान चारों भाइयों के विग्रह को गर्भगृह से निकालकर काष्ठ मंडप में विवाह अनुष्ठान कराया जाता है। महंत रामशरण दास बताते हैं कि मंदिर में प्रतिदिन रामलीला मंचन का भी आयोजन किया जा रहा है। गुरुवार को हल्दी की रस्म हुई। शुक्रवार को मंडप पूजा व शनिवार को भव्य रामबारात जबकि सोमवार को कलेवा के साथ विवाह महोत्सव का समापन होगा। महंत रामशरण दास कहते हैं कि विवाहोत्सव प्रभु से साक्षात साक्षात्कार का सशक्त माध्यम है। इस उत्सव में लीन होते ही प्रभु के सामीप्य का अहसास होता है।
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