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रौजागांव रेलवे स्टेशन भवन जर्जर, यात्री सुविधाओं का टोटा

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भेलसर। लखनऊ फैजाबाद रेलखंड पर स्थित अग्रेजों के जमाने का बना रौजागांव रेलवे स्टेशन के भवन की सूरत बदरंग है। रेलवे स्टेशन के भवन का रंग रोगन न होने से यह सदियों पुराना नजर आता है। वही यहां पर यात्रियों को मिलने वाली आम सुविधाओं का भी अभाव है। भवन जर्जर हो जाने से बारिश के दौरान छतों से पानी टपकता है। प्लेटफार्म पर यात्रियों के बैठने के लिए बेंच नहीं है। शौचालय की हालत बेहद खराब है। ऐसे में रेल कर्मचारियों एवं यात्रियों को दिक्कतें उठानी पड़ रही है।
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रौजागांव रेलवे स्टेशन आबादी के नजरिए से बेहद अहम माना जाता है। इस स्टेशन से बड़ी संख्या में उसके आसपास इलाके के गांव में रहने वाले लोग सफर करते हैं। आजादी के बाद से अब तक स्टेशन जाने के लिए कोई पक्का मार्ग का निर्माण नहीं कराया गया है। गड्ढा युक्त खडंजा मार्ग है जिस पर चार पहिया वाहन नहीं जा सकता है। इस स्टेशन पर सभी पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव है 7 बावजूद इसके स्टेशन पर बैठने के लिए लगाई गई बेंच टूटी हुई है।
वही आलम यह है की तेज गर्मी में यात्रियों को छाया में बैठने के लिए बेंच मौजूद नहीं है। सबसे ज्यादा समस्या महिलाओं को होती है क्योंकि स्टेशन पर शौचालय की व्यवस्था नहीं है जिसके कारण इस स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। हर महीने हजारों का राजस्व रेलवे विभाग को देने वाले इस रेलवे स्टेशन की ओर रेल अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट नहीं हो पा रहा है। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के पानी पीने के लिए मात्र दो हैंडपंप लगे हैं जिनमें एक खराब है।
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शाम ढले ही पूरा स्टेशन अंधेरे की गिरफ्त में आ जाता है वहीं सुरक्षा के दृष्टिगत भी स्टेशन पर कोई इंतजाम नहीं है। जिसके चलते चोर उचक्के अक्सर सक्रिय रहते हैं। स्थानीय लोगों ने इन समस्याओं के बाबत स्टेशन अधीक्षक को भी अवगत कराया है लेकिन अभी तक रेलवे के किसी भी बड़े अधिकारी तक इस समस्या की आवाज शायद नहीं पहुंची है। जिसके कारण यह स्टेशन अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है 7
दशकों पुराना रौजागांव रेलवे स्टेशन अपने विकास का इंतजार में है। जर्जर हो चुके ऐसे रेलवे क्वार्टर कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं। रेलकर्मियों के आवास के चारों ओर बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है। रौजागांव के पूर्व प्रधान रसीद खां बताते हैं कि रेलवे स्टेशन पर कई समस्याएं है पर किसको बताएं। उन्होंने बताया प्लेटफॉर्म न होने की वजह से ट्रेन पर चढ़ने में दिक्कतें आती है। लोग ट्रेन पर चढ़ते समय गिरकर चोटिल हो जाते हैं। इमारत सामने से बेशक टिपटाप जैसा लगता है लेकिन अंदर जाने पर छत से झांकते सूर्य देवता के दर्शन आसानी से हो जाते हैं।
इस लाइन का दोहरीकरण के साथ इलेक्ट्रिकरण होने वाला है इससे उम्मीद बंधी है कि स्टेशन का जर्जर भवन के स्थान पर दूसरा भवन व प्लेटफार्म बनेगा। पेयजल की व्यवस्था भी बेहतर हो जाएगी।
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- एस.के. झा अधीक्षक रौजागांव रेलवे स्टेशन
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