अयोध्या। कोरोना के बढ़ते कहर से नवरात्र के बाद अब सावन के उत्सव में भी लाखों भक्तों से गुलजार रहने वाली रामनगरी सूनी पड़ी है। शिवमंदिरों में सन्नाटा पसरा है। स्थानीय साधु-संत व भक्त शिवोपासना कर परंपरा निभा रहे हैं, न कहीं मेला की तैयारी दिख रही है, न विग्रहों को झूला झुलाने के लिए शोभायात्री की तैयारी का उत्साह। महामारी ने तीन माह से मठ-मंदिरों के बजट पर खासा असर डाला है। प्रसाद, फूल-माला, पूजा सामग्री, होटल-बाजार आदि कारोबार ठप प्राय हैं।
लोगों को राममंदिर के पक्ष में आए फैसले के बाद पर्यटकों की तादाद बढ़ने से कई गुना तरक्की की उम्मीद थी, लेकिन महामारी ने मंदिर निर्माण से मठ-मंदिरों के संचालन की व्यवस्था औेर कारोबार को पीछे ढकेल दिया है।
रामनगरी में भगवान राम व शिव में अभिन्नता प्रतिपादित है और सावन मास में तो यह अभिन्नता पूरे शिद्दत से बया होती है। परंतु इस वर्ष कोरोना के चलते सावन मास में भी रामनगरी भक्तों से सूनी है। सावन मास में जहां हजारों श्रद्घालुओं से रामनगरी स्थित पौराणिक शिवालय गुलजार होते थे।
वहीं कोरोना के कारण इस वर्ष शिवमंदिरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। स्थानीय साधु-संत एवं भक्त ही शिवमंदिरों में दर्शन-पूजन एवं शिवोपासना कर पा रहे हैं। कोरोना के चलते अयोध्या में बाहरी श्रद्घालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया हे। पहले कावड़ यात्रा फिर सावन मास में अयोध्या में बाहरी भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध के चलते रामनगरी में शिवोपासना गर्भगृह तक ही सीमित होकर रह गयी है।
अयोध्या में स्थित हैं कई पौराणिक शिवमंदिर
अयोध्या में कई पौराणिक शिवमंदिर स्थित हैं। ग्रंथ रुद्रयामल में वर्णित है कि अयोध्या स्थित नागेश्वरनाथ की स्थापना भगवान राम के पुत्र कुश ने की थी। सावन में यह मंदिर आस्था का केंद्र होता था, लेकिन कोरोना के चलते सावन मास में भी यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। नगरी की एक अन्य प्रमुख पीठ क्षीरेश्वरनाथ भी भक्तों से सूना है। यह मंदिर रामजन्म भूमि के ईशान कोण पर स्थित है। शास्त्रज्ञों का मानना है कि इस दिशा में शिव की स्थापना भगवान राम के आराध्य के रूप में है। इसी तरह अयोध्या राजपरिवार के प्रासाद में स्थित दर्शनेश्वर महादेव मंदिर, रामकोट में रामलला के थोड़ी दूर ही स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर, दशरथमहल बड़ास्थान में स्थित रामप्रसादेश्वर महादेव, च्रंद्रहरि महादेव, तपस्वी छावनी का रामेश्वरम शिव मंदिर में भी स्थानीय साधु-संत ही शिवापोसना कर पा रहे हैं।