अयोध्या। रामनगरी में सूर्यग्रहण का स्पर्श रविवार सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर होगा, जबकि मोक्ष दोपहर 2 बजकर 4 मिनट पर होगा। एक दिन पहले शनिवार देर रात से सूतक लगने के कारण मठ-मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। अब रविवार को मोक्ष के बाद ही भक्तों को आराध्य के दर्शन होंगे। आषाढ़ मास की अमावस्या का धर्मग्रंथों में विशेष महत्व है। सूर्य ग्रहण पर दान से पुण्य की प्राप्ति होती है।
ज्योतिषाचार्य शिवेंद्र ने बताया कि ग्रहण का सूतक 20 जून को रात में 10:30 बजे से लग जाएगा। 21 जून को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 2:04 तक ग्रहण रहेगा। ग्रहणकाल में प्रात: काल स्नान ध्यान करें और जो नित्य पूजा पाठ आप करते हैं उसे करें। मंदिर की पूजा नहीं की जाएगी। इस दौरान जिस मंत्र का जप करेंगे, वह सामान्य दिनों की अपेक्षा लाख गुना अधिक लाभदायक होता है।
ओम: नम: शिवाय, महामृत्युंजय’ आदि का मंत्र का जाप कर सकते हैं। सूर्य भगवान का मंत्र ओम: घृणि: सूर्याय नम: भी जप सकते हैं। जो भी मंत्र आप इस बीच जपेंगे वह आपके लिए बहुत ही अधिक लाभदायी होगा। वहीं, सूतक लगने के कारण शनिवार देर रात से ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। सिद्धपीठ हनुमान गढ़ी के पुजारी राजूदास ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद ही मंदिर में भक्तों को दर्शन सुलभ हो सकेगा। इसी तरह नाका हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नागेश्वरनाथ सहित अन्य मंदिरों में भी रविवार को दोपहर बाद ही दर्शन हो सकेंगे।
दोपहर तीन बजे के बाद होंगे रामलला के दर्शन
-रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि शनिवार शाम शयन आरती के बाद भक्तों को रामलला के दर्शन दूसरी पाली में तीन बजे के बाद ही हो पाएंगे। बताया कि ग्रहण का मोक्ष 2.04 मिनट पर होगा। जिसके बाद मंदिर की साफ-सफाई, भगवान का शृंगार, आरती पूजन करने के बाद ही करीब तीन बजे से ही भक्तों को दर्शन सुलभ हो पाएगा।
ग्रहणकाल में बरतें सावधानी
ज्योतिषाचार्य आचार्य शिवेंद्र ने बताया कि जिन जातकों को शनिग्रह की अढ़ैया अथवा साढ़ेसाती हो या जन्मकुंडली के अनुसार ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतरदशा प्रतिकूल हो तथा सूर्य के साथ राहु या केतु हों। उन्हें ग्रहणकाल में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सूर्य से संबंधित मंत्र का मानसिक जाप करें तथा आदित्यहृदयस्त्रोत या गायत्री मंत्र का जप करें। ग्रहण आद्रा नक्षत्र और मिथुन राशि पर लगेगा, जिसकी वजह से मिथुन राशि विशेष प्रभावित रहेगी।