विवादित परिसर में विराजमान रामलला के 68वें प्राकट्य महोत्सव में रविवार को अधिग्रहीत परिसर से पूजित कलश को लेकर सरयू में पूजन-अर्चन के बाद विसर्जित किया गया। दूसरी बेला गाजे-बाजे व घोड़े के साथ रामलला की भव्य शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों पर निकाली गई। इसी के साथ नौ दिवसीय प्राकट्य महोत्सव का समापन हो गया।
श्रीराम जन्मभूमि सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय रामलला का 68वां प्राकट्य महोत्सव 24 दिसंबर से वैदिक पूजन-अर्चन के साथ श्रीराम जन्मभूमि संपर्क मार्ग के सामने क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में कलश स्थापना के साथ आरंभ हुआ था।
शुक्रवार को समिति सदस्यों द्वारा पूजित कलश व चित्रपट को अधिग्रहीत परिसर स्थित गर्भगृह में विराजमान रामलला तक पुजारी के माध्यम से भिजवाया गया था। रविवार को समिति के संजय शुक्ल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामभद्र पाठक, कोषाध्यक्ष रामनाथ तिवारी, लालजी मिश्र, हिमांशु मिश्र, प्रदीप यादव, आदित्य शुक्ल, महंत बलराम दास आदि ने अधिगृहीत परिसर के रंगमहल बैरियर पर पूजित कलश व चित्रपट को पुजारी से वापस लिया। सदस्यों ने पूजित कलश का सरयू में पूजन-अर्चन के बाद विसर्जन किया।
शाम लगभग चार बजे रामजन्मभूमि संपर्क मार्ग के सामने से गाजे-बाजे के साथ चित्रपट से सजे रथ व रामलला की झांकियों को प्रदर्शित करती शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा कजियाना, टेढ़ीबाजार, वशिष्ठ कुंड, दुराही कुआं, कटरा, अशर्फी भवन, विभीषण कुंड, मातगैंड़, बड़ा डाकखाना, श्रंगारहाट, हनुमानगढ़ी चौराहा होते हुए वापस पहुंच समाप्त हुई। इसी के साथ प्राकट्य महोत्सव के समापन की घोषणा की गई।
यात्रा में समिति के पदाधिकारियों के साथ पुजारी रमेश दास, भाजपा जिलाध्यक्ष अवधेश पांडेय बादल, परमहंस महाविद्यालय के प्रबंधक ऋषिकेश उपाध्याय, परमानंद मिश्र, डॉ. बीडी द्विवेदी, अनूप गुप्त, कमल उपाध्याय, दुर्गा प्रसाद मिश्र, देवेंद्र सिंह, अंकित त्रिपाठी आदि सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल रहे।