अयोध्या। केंद्र व प्रदेश सरकार खेल व खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है, वहीं कुछ ऐसी प्रतिभाएं हैं जो उचित सहायता के अभाव में दम तोड़ती नजर आ रही हैं।
प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली सीमा पांडेय का सिलेक्शन 7 व 8 जुलाई को रूस में होने वाली अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हुआ है।
सीमित संसाधन के बावजूद जिले व प्रदेश का नाम रोशन करने वाली सीमा आर्थिक अभाव के चलते इस प्रतियोगिता में भाग लेने में असक्षम है, उसने आर्थिक मदद के लिए प्रदेश से लेकर जिले तक के खेल अधिकारियों से गोहार लगाई है लेकिन सभी ने मदद से इनकार कर दिया।
निराश व हताश सीमा का कहना है कि उसने अधिकारियों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मदद मांगी लेकिन यहां भी उसे निराशा हाथ लगी।
अयोध्या के दंतधावनकुंड इलाके की 24 वर्षीय सीमा स्ट्रांग वुमेन के रूप में जानी जाती है, उसकी चार बहन और दो भाई भी हैं। पिता भवननाथ पांडेय गाइड का काम कर किसी तरह घर का खर्चा चलाते हैं।
सीमा ने पूर्व में छत्तीसगढ़ में हुए नेशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में एक गोल्ड व तीन सिल्वर, हरिद्वार में हुए सीनियर ओपन प्रतियोगिता में गोल्ड, नागपुर में हुए जूनियर नेशनल में गोल्ड सहित अन्य प्रतियोगिताओं में गोल्ड व सिल्वर जीता है। उसने पिछले वर्ष अयोध्या में अपने दम पर जूनियर स्टेट चैंपियन भी करवाया था।
दिसंबर 2018 में उत्तराखंड में हुए चयन में उसका सिलेक्शन 7 व 8 जुलाई को रूस में होने वाले अंतरराष्ट्रीय पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ है।
सीमा का कहना है कि पावरलिफ्टिंग जैसे खेल के लिए सरकार बजट का रोना रोती है, ऐसे में उसे अपने खर्चे पर रूस जाना होगा। इसके लिए करीब तीन लाख रुपये का खर्चा आएगा।
कहा कि इतना पैसा उसके घरवालों के पास नहीं है, ऐसे में लगता है उसकी वर्षों की मेहनत बेकार जाएगी और वह इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाएगी।
उसने बताया कि इसके लिए वो बीते एक माह से प्रदेश के खेल अधिकारियों से मदद की गोहार लगा रही है लेकिन, उसकी किसी ने मदद की। बताया कि उसने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी मदद की गोहार लगाई लेकिन वहां से भी उसे निराशा हाथ लगी।
सीमा के पिता भवननाथ निराश होकर कहते हैं कि उनके सीमित खर्च से घर का खर्च उठाना मुश्किल होता है, ऐसे में तीन लाख रुपये वो कहां से लाए ये सोचकर वो परेशान है। कहा कि लगता है उनकी बेटी का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा।